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पान की खेती को बचाने के लिए राज्यपाल से लगाई गुहार, बंद अनुदान योजना फिर हो शुरू

विशेष संवाददाता--राज्य मुख्यालयराष्ट्रीय पान किसान यूनियन ने राज्यपाल को पत्र लिखकर प्रदेश में पान की खेती को संकट से बचाने की गुहार लगाई है। यूनियन की उत्तर प्रदेश इकाई के महामंत्री छोटेलाल चौरसिया ने राज्यपाल राम नाईक को लिखे गए इस पत्र में कहा है कि पान किसानों के लिए अनुदान की योजना बंद कर दी गई है जिससे पान के किसान संकट से घिर गए हैं।श्री चौरसिया ने राज्यपाल को जानकारी देते हुए पत्र में लिखा है कि वर्ष 2012-13 से पूर्व पान की फसल को किसी भी सरकारी योजना में शामिल नहीं किया गया था। पान किसान यूनियन द्वारा वर्ष 2011-12 में प्रदेश और तत्कालीन केन्द्र सरकार से पान की फसल को सरकारी योजना में शामिल कर अन्य फसलों की ही तरह पान की फसल को भी अनुदान दिए जाने की मांग की गयी थी।इसके परिणाम स्वरूप तत्कालीन प्रदेश सरकार द्वारा गुणवत्तायुक्त पान उत्पादन योजना वर्ष 2012-13 में लागू की गई। इस येाजना में 1500 वर्गमीटर जोत सीमा की एक यूनिट कास्ट 1, 51, 360 रुपये मानते हुए 50 प्रतिशत की दर से 75,680 रुपये का अनुदान मंजूर किया गया।इस योजना में 2012-13, 2013-14, 2014-15 और 2015-16 में एक-एक करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। वर्ष 2016-17 में केन्द्र सरकार द्वारा अनुदान राशि घटाकर 50 लाख कर दी गई। इस तरह तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा पान की फसल को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में वर्ष 2013-14 में शामिल कर 4.46 करोड़ रुपये की राशि अनुदान स्वरूप मंजूर की गई थी, जिसमें महज दो करोड़ का अनुदान दिया गया। शेष 2.46 करोड़ रुपये की राशि समर्पित करते हुए योजना को ही बंद कर दिया गया। श्री चौरसिया ने राज्यपाल को अवगत करवाया है कि पान की फसल में फंगल व बैक्टीरिया तथा रोग और कीट आदि की रोकथाम के लिए वर्ष 1980 में तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश की लखनऊ के एनबीआरआई द्वारा महोबा में पान अनुसंधान केन्द्र खोला गया था, जिसका लाभ समय-समय पर पान किसानों को मिलता रहा। वर्ष 2002 में महोबा पान अनुसंधान केन्द्र को बंद कर दिया गया। उन्होंने मांग की है कि महोबा के इस पान अनुसंधान केन्द्र को फिर से संचालित किया जाए।

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  • Web Title:Paan