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सरकारी विभागों से 22 सौ करोड़ रुपये की बिजली बिल की वसूली

- दिसम्बर तक सभी सरकारी विभागों में प्रीपेड मीटर

राज्य मुख्यालय- प्रमुख संवाददाता

सरकारी विभागों पर बिजली बिलों का 10 हजार करोड़ रुपये के बकाए में से 22 सौ करोड़ रुपये की वसूली 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में हो पाई हैं। ऊर्जा मंत्री का दावा है कि इस वित्तीय वर्ष में पिछला बकाया वसूलने के साथ ही सभी सरकारी भवनों में प्रीपेड मीटर लगा दिए जाएंगे। इससे बिलिंग का संकट खत्म हो जाएगा।

प्रमुख सचिव ऊर्जा और पॉवर कारपोरेाशन के चेयरमैन आलोक कुमार ने बताया कि सरकारी विभागों पर बिजली बिलों के बकाये की पूरी धनराशि तो नहीं मिल पाई है लेकिन अब तक 22 सौ करोड़ रुपये की धनराशि मिली है। यह पिछले वित्तीय वर्ष में मिली 1518 करोड़ के सापेक्ष सात सौ करोड़ अधिक है। बाकी बकाए के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। मार्च 2018 में ही नगर विकास विभाग ने 102 करोड़ रुपये देने के आदेश जारी कर दिए हैं। सिंचाई विभाग पुनर्विनियोग के माध्यम से 290 करोड़ रुपये और स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 80 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव वित्त विभाग को दिया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में नगर विकास विभाग को यह निर्देश दिए गए हैं कि अप्रैल 2018 की शुरुआत में ही बकाये धनराशि के सापेक्ष 1450 करोड़ रुपये यूपी पावर कारपोरेशन को दे दिए जाएं। भविष्य में भी जलकल विभाग, प्रकाश पथ प्रदर्शक विभाग और जल संस्थान के बिजली बकायों को 'फर्स्ट चार्ज' माना जाये।

वहीं एक लाख रुपये से अधिक बकाएदारों के खिलाफ अभियान में सरकारी विभागों पर भी शिकंजा कसा गया। इस अभियान में 9548 सरकारी विभागों के कनेक्शनों को भी काटा गया। जिनमें से 1857 उपभोक्ताओं से 76 करोड़ रुपये की धनराशि वसूली गई।

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