On the bada Mangal there is a huge crowd of devotee - बड़े मंगल पर यहां भक्तों की उमड़ती है अपार भीड़, दर्शन-पूजन से पूरी होती मनोकामना DA Image

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बड़े मंगल पर यहां भक्तों की उमड़ती है अपार भीड़, दर्शन-पूजन से पूरी होती मनोकामना 

एचएएल के शिवालय की महिमा अपार है। यहां पर श्रद्धालु जो भी मनौती मांगते हैं, अवश्य पूरी होती है। नवरात्र और बड़े मंगल पर यहां पर भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है।

लगभग 43 साल पहले (वर्ष 1976) बना शिवालय अब एचएएल में केदारेश्वर महादेव मंदिर के नाम से  पूरे शहर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर से देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु जुड़ाव रखते हैं। पिछले एक दशक से यहां पर हर बड़े मंगल पर शाम को लगने वाले भंडारे में पूरे शहर में अपनी अलग पहचान बना रखी है।

हर मंगल पर सुंदरकांड और बड़े मंगल पर भंडारा: केदारेश्वर महादेव मंदिर पर हर मंगल को सुंदरकांड पाठ का सिलसिला ढाई दशक से चल  रहा है। इसी तरह बड़े मंगल पर एचएएल गेट पर सुबह और शाम को केदारेश्वर महादेव मंदिर पर देर रात तक चलने वाले भंडारे ने पूरे शहर में अपनी अलग पहचान बना रखी है। आचार्य बताते हैं कि भंडारे का पूरा खर्च भक्त उठाते हैं। यहां हनुमान जी की विशेष कृपा है। उनके आशीर्वाद से जेठ माह के सभी बड़े मंगल पर भंडारा होता है। 

नवरात्र में देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
आचार्य पंडित शर्मा बताते हैं कि यूं तो मंदिर में रोज ही भक्त जुटते हैं। गुरू पूर्णिमा और कृष्ण जन्म का उत्सव भी बहुत खास होता है। परंतु चैत्र और शरद ऋतु के नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यहां पर पूजन का विशेष महत्व है। साल के दोनों ही नवरात्र पर अष्टमी पर होने वाले सामूहिक हवन में देश-विदेश में रहने वाले भक्त शामिल होते हैं। हवन में विशेष पूजा के लिए भक्त छह माह पहले ही बुकिंग करा लेते हैं। दिन के 11 से शाम पांच बजे तक चलने वाले हवन में हर तरह की पूजन सामग्री का प्रयोग होता है। इसमें शामिल होने वाले भक्तों की संख्या दो हजार तक पहुंच जाती है। अगले साल की चैत्र माह की नवमी पर भंडारे की परंपरा पूरी करते हुए तीन दशक हो जाएंगे। 

बद्रीनाथ धाम के पुरोहित कर रहे मंदिर की देखरेख
बद्रीनाथ धाम के पुरोहित आचार्य कामता प्रसाद शर्मा ने एचएएल में काम करने के समय से ही मंदिर के देखरेख की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले रखी है। आचार्य पंडित शर्मा बताते हैं कि यहां का शिवालय एचएएल के जंगलों के बीच गुमनामी में था। उन्होंने वर्ष 1990 से मंदिर की देखरेख का बीड़ा उठाया और तबसे आज तक मंदिर से भक्तों का जुड़ाव बढ़ता जा रहा है। मंदिर से अनवरत रूप से जुड़े भक्तों की संख्या अब तक 10 हजार तक पहुंच चुकी है। 

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