Officers absconding ahead of GST Mafia - जीएसटी माफिया के आगे बेबस हुए अफसर DA Image

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जीएसटी माफिया के आगे बेबस हुए अफसर

बिना लिखापढ़ी के माल एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाने का बड़ा नेटवर्क जारी20 लाख से कम का माल ट्रेन और पिकअप डाला से हो रही अवैध ढुलाईअफसरों के पसीने छूटे, रोकथाम के लिए बनाई गईं टीमें खाली हाथलखनऊ कार्यालय संवाददाताबिना लिखा पढ़ी के जीएसटी की चोरी करने वाले माफिया सक्रिय हैं। सुपाड़ी, मेंथा, लोहा, टाइल्स, ऑटोपार्टस और रेडीमेड गारमेन्ट्स के सामानों पर टैक्स चोरी से अरबों रुपये के वारे-न्यारे करने वालों पर अफसर शिकंजा नहीं कस सके। केन्द्र से फटकार पड़ी तो अफसरों में अब खलबली मच गई है। टैक्स चोरी को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने प्रदेश से की गई कार्रवाई का ब्यौरा तलब किया है। इस ब्यौरे पर 9 दिसम्बर को दिल्ली में केन्द्र सरकार समीक्षा करेगी। जीएसटी माफिया जिस तरह से टैक्स चोरी करके अपनी जेबें भर रहे हैं। इसकी शिकायत लखनऊ व्यापार मंडल के व्यापारियों ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने व्यापारियों के संवाद कार्यक्रम में की थी। इसके बावजूद वाणिज्य कर विभाग में बनी एसआईबी सेल और केन्द्र सरकार के आदेश पर बनी एंटी प्राफिट विंग हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। इसका फायदा सुपाड़ी, मेंथा, लोहा, टाइल्स, ऑटोपार्टस और रेडीमेड गारमेन्ट्स के जीएसटी माफिया उठाकर अरबों रुपये की टैक्स चोरी कर ली। एसआईबी छापों पर लगी रोक से बिगड़ा मामलाजुलाई 2017 में जीएसटी लगने के बाद प्रदेश में एसआईबी के छापों को साथ ही राजमार्गों व रेलवे के जरिए आने वाले माल की जांच पर रोक लगा दी गई। यह जांच सितम्बर तक बंद रही। इस दौरान जीएसटी माफियाओं ने जमकर टैक्स चोरी करके माल गोदामों में इकट्ठा कर लिया। इन लोगों ने किस तरह टैक्स चोरी की इसका अंदाजा तब लगा जब लखनऊ शहर में एसआईबी के तीन दिन के छापे में कई करोड़ का लोहा, रेडीमेड गारमेन्ट्स आदि पकड़ा गया। सूत्रों का कहना है कि अक्टूबर तक एसआईबी जांच करने के आदेश जारी हो जाने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ और एसआईबी टीम खाली बैठी रही। जीएसटी के नियमों का उठाया फायदाजीएसटी काउंसिल ने व्यापारियों को 50 हजार तक के माल पर ई-वे बिल पर छूट दे रखी थी। जिसका फायदा यह हुआ कि 50 हजार से कम कीमत के मालों के आने की आमद अचानक बढ़ गई। यही नहीं इनकी पिकअप डाला से उपायों द्वारा धड़ल्ले से ढुलाई भी शुरू हो गई। जबकि इसी बात को लेकर उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने व्यापारी नेता हरीशचन्द्र अग्रवाल ने आपत्ति दर्ज कराई थी। फर्जी जीएसटीएन से निकाला जा रहा अवैध मालरेलवे स्टेशन से अवैध माल निकालने के लिए फर्जी जीएसटी नम्बर डाला जा रहा है। यह खुलासा तब हुआ जब कुछ दिन पहले इस अवैध माल को निकालने की वसूली को लेकर वाणिज्य कर विभाग में तैनात दो पुलिस कर्मियों के बीच मारपीट हो गई। यह मामला भी वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश मेश्राम समेत शासन के आला अधिकारियों के सामने भी उठाया जा चुका है। लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही यह अवैध ढुलाई बंद हुई। क्योंकि इस मामले की देखरेख के लिए रेलवे स्टेशन पर कोई भी विभागीय चौकी नहीं बनी है। कोट:एसआईबी की कार्रवाई में कहीं कोई कमी नहीं आई है। पहले की गई छापेमारी में लगभग 50 लाख रुपये का राजस्व भी वसूला जा चुका है। चुनाव ड्यूटी की वजह से छापे व जांच बंद थे अब यह अभियान फिर जोर-शोर से शुरू किया जाएगा। रही बात शासन द्वारा फटकार की तो ऐसा कुछ नहीं है। केन्द्र सरकार समीक्षा के लिए प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी है।अनंजय राय, एडिशनल कमिश्नर एसआईबी

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