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न्यास ने गोंडा के परसपुर सूकरखेत को तुलसी जन्मस्थली घोषित करने की मांग उठाई 

एटा जिले के सोरो को रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली के रूप में पर्यटनस्थल घोषित करने की प्रदेश सरकार द्वारा की गयी घोषणा को लेकर तुलसीदास जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष स्वामी भगवदाचार्य ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार से पुनः गोण्डा के परसपुर में स्थित सूकरखेत को तुलसी जन्मस्थली के रूप में घोषित कर पर्यटनस्थल के रूप में घोषित करने की मांग की है। यहां एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने दावा करते हुये कहा कि तुलसीदास की जन्मस्थली गोण्डा जिले में परसपुर के राजापुर में सू्करखेत घोषित है जबकि एटा के सोरो को दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व मे नकारा जा चुका है। 
उन्होंने बताया कि 31 मई 1960 को अखिल भारतीय संगोष्ठी में आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र , डा. नागेन्द्र , डा.गोवर्धननाथ शुक्ल व अन्य विद्वानों ने सोरो को गोस्वामी जी की जन्मस्थली को पूर्ण रूप से रिजेक्ट कर दिया था। इसी प्रकार 26 दिसम्बर 2005 को महात्मा गांधी काशी विद्या पीठ वाराणसी में सनातन धर्म परिषद व तुलसी भूमि सूकरखेत विकास समिति के तत्वाधान में चतुर्थ विश्व तुलसी सम्मेलन में प्रोफेसर सुरेन्द्र सिंह कुलपति की अध्यक्षता में गोण्डा को जन्मभूमि स्वीकार किया। 
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीस लाख अनुदान के साथ गोंडा में तुलसी जन्मस्थली स्वीकार की थी। इसके अलावा शंकराचार्य , मुरारी बापू व अन्य महात्मा भी इसे स्वीकार कर चुके है l उन्होंने सरकार को आगाह किया कि यदि शीघ्र गोण्डा में तुलसी जन्मस्थली पुनः घोषित नहीं की गयी तो वे जनांदोलन के लिये बाध्य होंगे। इसके अतिरिक्त नगर के फव्वारा चौराहा का नामकरण कर तुलसी चौराहा और जिला पंचायत सभागार का नाम तुलसी सभागार घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के माध्यम से ये महत्वपूर्ण मुद्दा विधानसभा और लोकसभा में उठाया जायेगा।  

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  • Web Title:Nyaas demanded to declare Parsapur Sukarkhet of Gonda to be the birthplace of Tulsi