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बैटरी से झुलसी आहार नाल एंडोस्कोप से दुरुस्त किया

लखनऊ। वरिष्ठ संवाददाता

हाथ की घड़ी व खिलौने में लगने वाले छोटे सेल (बटन बैटरी) से सावधान रहें। छोटे बच्चों को बटन बैटरी से दूर रखें। अकसर बच्चे खेल-खेल में बैटरी निगल लेते हैं। यह खतरनाक साबित हो सकता है। यदि बच्चे ने बटन बैट्री निगल ली है तो उसे फौरन चम्मच से शहद पिलाएं। ताकि बैटरी कहीं अटके नहीं। क्योंकि आहार नली में बटरी के अटकना नुकसानदेह है। बैटरी के हानिकारक कैमिकल से आहार नली झुलस कर सिकुड़ सकती है। केजीएमयू के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में ऐसे बच्चों का इलाज शुरू हो गया है।

पीडियाट्रिक गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि बटन बैटरी निगलने वाले बच्चों के इलाज में देरी घातक साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि गुजरे बुधवार को एक बच्चे की सिकुड़ी आहार नाल को इंडोस्कोप के जरिए ठीक किया है। राजधानी निवासी इस बच्चे ने करीब आठ माह पहले बैट्री निगल ली थी। शौच के रास्ते बैट्री निकल गई थी। पर, बैटरी के हानिकारक केमिकल से आहार नाल झुलस गई थी। उसमें सिकुड़न आ गई थी। बच्चे को खाना खाने में अड़चन हुई। कुछ भी खाते ही उल्टी हो जाती थी। इंडोस्कोप के जरिए सिकुड़न वाले हिस्से को फैलाया। अब बच्चा स्वस्थ्य है।

लार से गल जाता है बैटरी का हिस्सा

डॉ. संजीव के मुताबिक कई बार खेलते वक्त बच्चे बैटरी निगल लेते हैं। लार के संपर्क में आते ही बैटरी के ऊपरी सतह पर चिपकी प्लास्टिक कोड गलने लगती है। बैटरी में मौजूद घातक अल्काइन केमिकल का रिसाव शुरू हो जाता है। यह केमिकल बच्चे की आहार नाल झुलस जाती है। आहार नाल सिकुड़ जाती है।

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