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कामकाज-- विद्युत अभियंताओं ने इंजीनियर्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

विद्युत अभियंता संघ ने इंजीनियर्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की है। संघ के महासचिव राजीव कुमार ने बताया कि ऊर्जा निगमों में पिछले एक वर्ष से बैठकों, समीक्षाओं व सूचनाएं मांगी जा रही है। इससे अभियन्ताओं को सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने एवं कार्य करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। इससे प्रबन्धन द्वारा अपेक्षित अव्यवहारिक लक्ष्य प्राप्त न करने एवं अन्यथा अन्य कारणों से प्रबन्धन द्वारा अभियन्ताओं का हर स्तर पर उत्पीड़न किया जा रहा है। जिससे अभियन्ता बहुत ही मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने बताया कि विद्युत अभियन्ता संघ ने 14 सितम्बर को केन्द्रीय कार्यकारिणी की पूर्ण बैठक बुलाई है।

अभियन्ता संवर्ग का वेतन सातवें वेतनमान में कम कर दिया

ऊर्जा निगमों में लगभग सभी संवर्गों को छठे वेतनमान में उच्चीकृत ग्रेड पे का लाभ प्रदान किया है। यहां तक की कई संवर्गों को कई लाभ दिये गये हैं। इसके बावजूद अभियन्ता संवर्ग का वेतन छठे वेतनमान में कम एवं सातवें वेतनमान में और कम कर दिया गया है। इससे अवर अभियन्ता संवर्ग एवं अभियन्ता संवर्ग के मध्य वेतन अनुपात 1.25 रह गया है। जो पूर्व में 1.77 था। जबकि राज्य सरकार के अवर अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता के मध्य यह अनुपात 1.58 है। राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक वेतनमान में यह अनुपात बढ़ाया जाता रहा है। परन्तु ऊर्जा निगम प्रबन्धन द्वारा यह अनुपात लगातार घटाया जा रहा है। छठे वेतनमान में यह अनुपात 1.3 तथा सातवें वेतनमान में 1.25 कर दिया गया है। इस प्रकार अभियन्ता संवर्ग की भी ग्रेड पे उच्चीकृत करते हुए ग्रेड पे 6600 पर 05 प्रारम्भिक वेतन वृद्धियां प्रदान करते हुए वेतन निर्धारित किया जाये। इसी प्रकार वित्त सचिव, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अनुमोदित अधीक्षण अभियन्ता का वेतनमान एक जनवरी 1996 से दिये जाने के आदेश तत्काल जारी किये जायें जिससे वरिष्ठ अभियन्ताओं एवं अधीनस्थ अवर अभियन्ताओं के मध्य व्याप्त वेतन विसंगति दूर हो सके।

मारपीट करने वालों पर रासुका लगाने की मांग

उन्होंने बताया कि बैठक में बिजली अभियन्ताओं के साथ क्षेत्रों में बढ़ रही मारपीट एवं फर्जी एफआईआर की घटनाओं पर विचार विमर्श किया जायेगा। क्योंकि पिछले में ऊर्जा मंत्री द्वारा बिजली अभियन्ताओं एवं कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा देने तथा उपद्रवियों को रासुका में निरूद्ध करने की घोषणा के बाद भी न तो अभियन्ताओं पर हमले रूके हैं और न ही आज तक उपद्रवियों पर रासुका लगाई गयी है। इससे बिजली चोरों के हौसले बुलन्द है।

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