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होली पर अनहोनी से निपटने के लिए अस्पताल तैयार

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

रंगों के उत्सव को धूमधाम और उल्लास से मनाएं। एहतियात जरूरत बरतें। इसके बावजूद अनहोनी होने पर घबराएं नहीं। किसी भी तरह अनहोनी से निपटने के लिए सरकारी अस्पताल तैयार हैं। इन अस्पतालों में डॉक्टरों की टीमें लगा दी गई हैं।

सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के सभी अस्पतालों में अर्लट जारी कर दिया गया है। डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें लगाई गई हैं। सभी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाएं मुस्तैद रखने को कहा गया है। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि 12 बेड आरक्षित किए गए हैं। अतिरिक्त 15 डॉक्टरों की टीम लगाई गई है। एक बैकअप टीम भी बनाई गई है। 20 पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें बनाई गई हैं। लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एमएल भार्गव ने बताया कि 10 बेड आरक्षित किए गए है। आपात स्थिति से निपटने के लिए नेत्र, त्वचा, मेडिसिन और हड्डी रोग विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई गई है। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि 40 बेड की इमरजेंसी तैयार है। आपात स्थिति में वार्ड नौ आरक्षित किया गया है। इसमें 20 बेड हैं। विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई गई हैं।

केजीएमयू

चौक स्थित केजीएमयू में होली में अनहोनी से निपटने की व्यवस्था की गई है।

प्लॉस्टिक सर्जरी विभाग-9415200444

पीआरओ-9415007710

लोहिया अस्पताल

गोमतीनगर विभूतिखंड स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं दुरुस्त करा दी गई हैं। डॉक्टर टीम में नेत्र, त्वचा, हड्डी और ईएनटी विशेषज्ञ को शामिल किया गया है।

सिविल अस्पताल

हजरतगंज पार्क रोड स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल दुघर्टना से निपटने को तैयार है।

इमरजेंसी नम्बर -0522-2239007

रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल

राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में होली को लेकर इमरजेंसी में आठ बेड अलग किए गए हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके चौधरी ने बताया कि नेत्र, हड्डी व दूसरे रोगों के चिकित्सक की टीम बनाई गई हैं।

इमरजेंसी नम्बर-0522-2661370

बलरामपुर अस्पताल

गोलागंज स्थित बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि होली में पूरे दिन इमरजेंसी चलेगी। डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से ड्यूटी लगाई गई है।

इमरजेंसी नम्बर-0522-2624040

लोकबंधु राजनारायण अस्पताल

कानपुर रोड स्थित राज नारायण अस्पताल में होली को लेकर अलर्ट है। दुघर्टना में घायलों को हर संभव इलाज मिलेगा। इमरजेंसी में दवा की व्यवस्था करा दी गई है।

एम्बुलेंस के लिए संपर्क करें

102 व 108

सीएमओ कंट्रोल रूम

7839700132

0522-2622080

स्वास्थ्य विभाग टोल फ्री नम्बर

18001805145

ये बरतें एहतियात

दमा के रोगी रहे सावधान

सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष दुबे के मुताबिक दमा के रोगी रंग से बचकर रहें। क्योंकि रंग के अंश नाक की नली में जाने से संक्रमण पैदा कर सकते हैं। जिससे दमा का अटैक पड़ सकता है। लिहाजा जिस स्थान पर रंग उड़ रहा हो वहां जाने से बचे।

नशे में गाड़ी न चलाएं

शराब के नशे में कतई गाड़ी न चलाएं। जरा सी चूक रंग में भंग घोल सकती है। होली में सबसे अधिक नशे में गाड़ी चलाने वाले ही घायल होते हैं। दूसरे भी इनकी चपेट में आ जाते हैं। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक होली में सबसे अधिक नशेड़ी घायल होते हैं। होली को बदरंग होने से बचाने के लिए एहतियात बरतें। शराब व अन्य नशा करने से बचें। पानी भरे गुब्बारे से होली खेलना खतरनाक है। इससे शरीर में चोट आ सकती है। हाथ से रंग खेलें।

रंगों की चमक में न फंसे

केजीएमयू पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि लाल, पीला, हरा और गुलाबी गुलाल। दिखने में खुबसूरत व खुशुबूदार। इन्हीं खूबियों के फेर में फंसकर लोग घटिया व रसायनिक रंग के शिकार बन गए। घटिया रंग और गुलाल ने न सिर्फ लोगों के गाल लाल किए, बल्कि त्वचा को भी नुकसान पहुँचा दिया। चेहरे पर लाल रंग के दाने ऊभर आए। बाल झड़ने की शिकायत लेकर भी तमाम लोग अस्पताल पहुंचे।

जलन होने पर ठंडे पानी से धुले

पीजीआई में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल के मुताबिक सिंथेटिक रंग में लैड, ऑयरन, क्रोमियम और निकिल आदि के सॉल्ट की मिलावट होती है। जो त्वचा के लिए बेहद घातक हैं। पहले तो सिंथेटिक रंग त्वचा को रूखा बना देते हैं। काफी प्रयास के बाद भी नहीं छूटते। रंग लगा हिस्सा धूप के संपर्क में आते ही जलन शुरू हो जाती है। फिर रंग लगे हिस्से में लालीपन आ जाता है। छोटे-छोटे दाने ऊभर आते हैं। कैमिकलयुक्त रंग के कण घाव के संपर्क में आने पर घातक रूप ले सकती है। घाव वाले हिस्से पर संक्रमण हो सकता है।

शरीर पर तेल

बलरामपुर अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएच उस्मानी का कहना है कि गीला रंग खेलने से परहेज करें। हर्बल गुलाल का इस्तेमाल करें। उन्होंने बताया कि लाल, हरा, बैगनी, पीले और नीला रंग में ऐसे रसायन होते हैं, जो त्वचा पर लगते ही जलन, खुजली, छाले व दाने जैसी समस्या पैदा करते हैं। हर्बल गुलाल का इस्तेमाल करें। रंग खेलने से पहले सरसो या नारियल का तेल, वैस्लीन, कोल्ड क्रीम का प्रयोग करें।

बचा रंग खुले में न रखे

डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि रंग और गुलाल बचने पर उसे घर में खुले में न रखें। हो सके तो उसे फेंक दें। क्योंकि खाने व पानी में रंग पड़ने पर हानिकारक तत्व पेट में जा सकते हैं। जिससे पेट खराब हो सकता है। पेट के संक्रमण के खतरे की गुंजाइश अधिक रहती है।

आंखों के मरीज गीले रंग से बचें

राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके विश्नोई के मुताबिक गीला रंग आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। हाल के दिनों में आंख का ऑपरेशन कराने वाले चश्मा लगाकर रंग खेल सकते हैं। आंख में रंग पड़ने पर या फिर खुजली होन पर उसे रगड़े नहीं। बल्कि ठंडे पानी से आंखों को धोएं।

सुरक्षा

-मोटे व कॉटन के कपड़े पहने

-गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें

-सर्दी जुखाम से पीडि़त गीले रंग से बचें

-ऐसे कपडे़ पहने जिससे पूरा शरीर ढका रहे

-रंग लगते ही उसे धोने की कोशिश करनी चाहिए

-रंग से भीगने पर शरीर को बार-बार धूप में न सुखाएं

-रंग खेलने से पहले उबटन, सरसो का तेल, वैसलीन और नारियल का तेल लगाना फायदेमंद है

-आंख में रंग पड़ने या खुजली होन पर उसे रगड़े नहीं। ठंडे पानी से आंख धोएं।

बचाव

-उबटन से रंग छुड़ाएं

-अधिक देर तक त्वचा पर साबून न रगड़े

-बालों में टोपी लगाएं

-त्वचा में खुजली के साथ पानी निकले तो उसे ठंडे पानी से धूले

-बर्फ को कपड़े में रखकर सिकाई करें

-चेहरे पर रंग, पेंट, सफेदा व वार्निश आदि छुटाने के लिए मिट्टी का तेल न लगाएं।

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