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केजीएमयू में रैगिंग के आरोपी सीनियर रेजीडेंट ने दिया इस्तीफा

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

जिस रैगिंग के आरोपी सीनियर रेजीडेंट को केजीएमयू के डॉक्टरों ने बचाने की झूठी कहानी गढ़ी उसने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद रैगिंग के मामले में नया मोड़ आ गया। अधिकारियों ने पीड़ित जूनियर डॉक्टरों को इस्तीफे की प्रति दिखाई। रैगिंग की शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। आखिर में पीड़ित रेजीडेंट डॉक्टरों ने शिकायत वापस ले ली।

ये था मामला

रेडियोथेरेपी विभाग में रेजीडेंट डॉक्टर पढ़ाई के साथ मरीजों का इलाज करते हैं। रेडियोथेरेपी विभाग में चार जूनियर रेजीडेंट को सीनियर डॉक्टर लगातार परेशान कर रहे थे। मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। उत्पीड़न के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों ने चार दिसम्बर को चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा से लिखित शिकायत की थी। 12 दिसम्बर को चीफ प्रॉक्टर ने कमेटी बनाकर जांच कराई थी। इसमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. यूबी मिश्र, डीन चिकित्सा संकाय डॉ. विनीता दास और विभागाध्यक्ष फॉरेंसिक डॉ. अनूप कुमार वर्मा शामिल थे। जांच समिति ने चारों डॉक्टरों से बयान लिए। आरोपी सीनियर रेजीडेंट से पूछताछ की। कार्यवाही करने के बजाए चारों डॉक्टरों को माफीनामा लिखने का फैसला सुनाया। साथ ही छुट्टी के दिन का वेतन काटने को कहा। इस पर पीड़ित छात्र ने घटना की शिकायत केंद्रीय मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की रैगिंग सेल में की। एमसीआई ने केजीएमयू को पत्र जारी कर मामले को गंभीरता से जांच करने को कहा है।

अफसर मामले को दबाने में जुटे रहे

रैगिंग के आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई करने के बजाए केजीएमयू के अफसर मामले को छुपाने में जुट गए। करीब दो महीने से मामले को दबाए बैठे रहे। जब पीड़ित ने प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने का साहस जुटाया तब अफसरों ने जांच के नाम पर लीपापोती की। एक जूनियर डॉक्टरों के साहस ने केजीएमयू अफसरों की रैगिंग से निपटने के इंतजामों की पोल खोल दी। एमसीआई के सामने जांच का सच उजागर कर दिया।

बेहद नाटकीय ढंग से मामला खत्म

‘हिन्दुस्तान में प्रमुखता से रैगिंग की खबर प्रकाशित होने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने किरकिरी से बचने के लिए फिर से कमेटी बनाने का फैसला किया। इसी दौरान शाम को आरोपित सीनियर रेजीडेंट ने बेहद नाटकीय ढंग से अपना इस्तीफा केजीएमयू सीएमएस को सौप दिया। इसके बाद अफसरों ने जूनियर रेजीडेंट पर शिकायत वापस लेने की बात कही। जूनियर रेजीडेंट का कहना है कि रैगिंग व उत्पीड़न की घटना भविष्य में नहीं होनी चाहिए। इसके बाद शिकायत वापस ले ली गई। इसके बाद पूरी घटना की जानकारी केजीएमयू प्रशासन ने एमसीआई को सौंप दी।

रैगिंग के लिए लंबा ताम-झाम

केजीएमयू में रैगिंग रोकने के लिए लंबा तामझाम है। करीब 30 डॉक्टरों की फौज रैगिंग रोकने के लिए लगाई गई है। सुरक्षागार्ड, सीसीटीवी कैमरे आदि भी हॉस्टल व परिसर में लगाए गए हैं। इसके बाद भी सीनियर रैगिंग के नाम पर जूनियर को परेशान कर रहे हैं। वहीं केजीएमयू प्रशासन रैगिंग रोक पाने में नाकाम अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। हालात यह है कि रैगिंग की इतनी बड़ी घटना के बाद भी किसी अफसर पर जिम्मेदारी तय नहीं हुई।

रैगिंग को गंभीरता से नहीं लिया अफसरों ने

रेजीडेंट डॉक्टरों का आरोप है कि अफसरों ने रैगिंग की घटना को गंभीरता से नहीं लिया। जांच व कार्रवाई के नाम पर पीड़ित को ही परेशान किया। मजबूरन एमसीआई में फरियाद करनी पड़ी। वहीं केजीएमयू प्रशासन ने किसी भी अफसर पर इस नाकामी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया। सीनियर के इस्तीफे के बाद मामले को रफा-दफा किया जा रहा है। रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि अफसरों की मनमानी से भविष्य में सीनियरों का उत्पीड़न थमने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।

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