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केजीएमयू में बोनमैरो ट्रांसप्लांट से होगा रक्त कैंसर का इलाज

दुनिया भर के 300 विशेषज्ञ लेंगे कार्यशाला में हिस्सा

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

केजीएमयू में रक्त कैंसर का इलाज बोनमैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से होगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। संसाधन जुटा लिए गए हैं। हिमेटोलॉजी विभाग में तहत रक्त कैंसर से पीड़ित मरीजों का इलाज होगा। यह जानकारी हिमेटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एके त्रिपाठी ने दी।

वह गुरुवार को केजीएमयू शताब्दी अस्पताल के हिमेटोलॉजी विभाग में पत्रकारों को जानकारी दे रहे थे। डॉ. एके त्रिपाठी ने कहा कि रक्त कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। केजीएमयू में बोनमैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) नहीं हो रहा है। इसकी वजह से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इसमें मरीजों का काफी समय बेकार हो जाता है। मरीजों को दुश्वारियां भी हो रही थीं। मरीजों की परेशानी को कम करने के लिए बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की तैयारी पूरी कर दी गई है। इसमें लिम्फोमा माइलोमा का बेहतर इलाज हो सकेगा। यह एक प्रकार का रक्त कैंसर है। उन्होंने बताया कि ऑटो लॉग्स स्टेम सेल से इलाज होगा। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। यूनिट काफी हद तक तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बोन मैरो स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में पहले मरीज की कीमोथेरेपी की जाती है। ताकि कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सके। कैंसर के प्रभाव को भी कम किया जा सके। इसके बाद रीढ़ की हड्डी में सुई की मदद से बोनमैरो लेते हैं। इसके बाद बोनमैरो से स्टेम सेल लेते हैं। इस दौरान मरीज को और प्रभावी कीमोथेरेपी देते हैं। ताकि खून में मौजूद कैंसर सेल का खत्मा किया जा सके। इसके बाद स्टेम सेल मरीज में इंजेक्शन के जरिए प्रवेश करा देते हैं। नतीजतन बोनमैरो से कैंसर का खात्मक मुमकिन है। धीरे-धीरे रक्त कैंसर का खत्मा हो जाता है।

जल्द आ रहे मरीज

डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि पहले रक्त समेत दूसरे कैंसर के मरीज आखिरी स्टेज में अस्पताल आ रहे हैं। लोगों में पहले से जागरुकता बढ़ी है। नतीजतन बीमारी के ढ़ाई माह के भीतर ही मरीज अस्पताल आ रहे हैं। समय पर इलाज से कैंसर को ठीक करना आसान है। उन्होंने बताया कि पहले बीमारी होने के ढाई साल बाद अस्पताल पहुंचते थे।

खून की जांच से बीमारी का पता

रक्त कैंसर का पता लगाने के लिए बहुत जांचें करानी की जरूरत नहीं है। सिर्फ खून की जांच से बीमारी का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बोनमैरो में खून की आधी बूंद से कैंसर जैसी घातक बीमारी का पता लगाया जा सकता है।

रक्त कैंसर के लक्षण

अधिक दिनों तक बुखार

रक्तस्राव

खून की कमी

बदन में गिलटियां।

कार्यशाला कल से

इंडियन सोसाइटी ऑफ हिमैटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन यूरोपियन हिमैटोलॉजी सोसोइटी ट्यूटोरियल की ओर से तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि गोमतीनगर स्थित होटल ताज में कार्यशाला का आयोजन किया गया है। 16 से 18 फरवरी तक कार्यशाला होगी। इसमें दुनियर भर के 300 कैंसर रोग विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। कार्यशाला में कैंसर की नई दवाएं व उपचार की तकनीक पर चर्चा होगी।

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