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केजीएमयू में बनेगा पहला मदर मिल्क बैंक

शिशुओं को मां का दूध मुहैया कराने के लिए उठाया जाएगा अहम कदम

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

केजीएमयू में मदर मिल्क बैंक बनेगा। इसको लेकर गुरुवार को ट्रॉमा सेंटर में अधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें मदर मिल बैंक बनाने के मसले पर अंतिम मुहर लग गई। प्रदेश का पहला ऐसा बैंक होगा जहां मदर मिल्क को छह महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा। इससे जन्म के दौरान मां का दूध न मिलने से कई बार नवजातों की हालत बिगड़ जाती है।

पीडियाट्रिक विभाग की डॉ. माला कुमार ने बताया कि मदर मिल्क बैंक की स्थापना ट्रॉमा सेंटर के पांचवें तल पर होगी। वहीं एक मिल्क कलेक्शन सेंटर को ट्रॉमा के चौथे तल पर बने एनआईसीयू और दो सेंटर को क्वीनमेरी में बनाया जाएगा। केजीएमयू के सह प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि इस कार्य में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) और संस्थाओं का भी सहयोग लिया जायेगा। आशा और एएनएम की मदद से गांव-गांव तक यह जानकारी पहुंचाई जाएगी। मां का दूध शिशु के लिए कितना जरूरी है। इसमें अच्छा काम करने वाली इकाइयों को सम्मानित भी किया जाएगा। माताओं को भी बताया जाएगा कि यह बच्चे और मां दोनों की सेहत के लिए अच्छा है। उन्होंने बताया कि मदर मिल्क बैंक में इलेक्ट्रिक ब्रेस्ट पंप मशीन होगी। इसके माध्यम से डोनर से दूध लिया जाता है। इस दूध का माइक्रोबायलॉजिकल टेस्ट होता है। रिपोर्ट में दूध की गुणवत्ता सही होने के बाद उसे कांच की बोतलों में 30-30 मिलीलीटर की यूनिट बनाकर निश्चित तापमान में सुरक्षित रख दिया जाता है। बैंक में दूध 6 महीने तक सुरक्षित रहता है और जरूरत पड़ने पर यह नवजातों को दिया जाता है।

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