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प्रदूषण से दिल के मरीजों में बढ़ी बेचैनी, आईसीयू फुल

-आंख व त्वचा रोगियों की संख्या में भी इजाफा

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

वातावरण में बढ़ा प्रदूषण का स्तर दिल के मरीजों पर आफत बन गया है। हालात यह हैं कि आईसीयू में मरीजों को बेड नहीं मिल रहा है। दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को बेड की खातिर एक से दूसरे अस्पताल भटकना पड़ रहा है। लोहिया संस्थान व केजीएमयू में तो एक-एक बेड को लेकर मारामारी मची है। वहीं सिविल और बलरामपुर अस्पताल में भी बेड भरे हैं।

10 प्रतिशत बढ़े दिल के मरीज

लोहिया संस्थान के कॉर्डियोलॉजी विभाग के आईसीयू में 20 बेड हैं। 12 बेड विभाग में हैं। मौजूदा समय में विभाग के ज्यादातर बेड भरे हैं। विभाग के डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने बताया कि ठंड और प्रदूषण की वजह से दिल के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। उन्होंने बताया कि दिल का दौरा पड़ने के मामलों में भी वृद्धि हुई है। समय पर मरीजों को इलाज मुहैया कराया जा रहा है। ओपीडी में 10 प्रतिशत मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।

बेड भरे होने से मरीजों की सांसें फूली

सिविल अस्पताल के कॉर्डियोलॉजी विभाग के आईसीयू में 10 बेड हैं। बुधवार को आईसीयू में सभी बेड भर गए। वहीं कॉर्डियोलॉजी पुरुष वार्ड में 14 व महिला के 19 बेड हैं। इनमें सभी बेड भरे हैं। अस्पताल के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि दिल के मरीजों को इस मौसम में संभल कर रहने की जरूरत है। प्रदूषण व ठंड से दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। लोहिया अस्पताल के आईसीयू के सभी बेड भरे हैं।

लौटाए जा रहे दिल के मरीज

केजीएमयू लॉरी कॉर्डियोलॉजी विभाग में दिल के मरीजों को मुकम्मल इलाज नहीं मिल रहा है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। आईसीयू में बेड के संकट की वजह से मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही हैं। रोजाना इमरजेंसी से तीन से चार मरीज बिना इलाज लौटाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा रात में मरीजों को लौटाया जा रहा है। विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि आईसीयू व वार्ड फुल होने से मरीजों को दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। इमरजेंसी में पांच बेड हैं। उसमें भी बेड खाली नहीं हैं। केजीएमयू सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि मरीजों का दबाव काफी है। स्ट्रेचर पर गंभीर मरीजों को इलाज उपलब्ध कराना पड़ रहा है। किसी भी गंभीर मरीज को लौटाया नहीं जा रहा है। यही हाल बलरामपुर अस्पताल का है। यहां भी मरीजों को इलाज के लिए दौड़ाया जा रहा है। सबसे ज्यादा खराब स्थित आईसीयू की है। निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि 14 बेड हैं। सात आईसीसीयू और सात बेड आईसीयू में हैं। दो बेड ही खाली हैं। उन्होंने बताया कि मरीजों का दबाव काफी है। गंभीर मरीजों को बिना इलाज नहीं लौटाया जा रहा है।

वर्जन

यह मौसम बच्चों और बुजुर्गों की सेहत के लिए खराब है। इस मौसम में संजीदा रहने की जरूरत है। बच्चों को बाहर निकालने से बचें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। स्वेटर, टोपी और मोजे पहनाकर ही बच्चों को बाहर निकलने दें। सर्दी-जुकाम व सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर की सलाह लें। बच्चों की सेहत के प्रति थोड़ी सी लापरवाही से स्थिति बिगड़ सकती है।

डॉ. आशीष वाखलू, पीडियाट्रिक सर्जन, केजीएमयू

प्रदूषण का स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा है। ओपीडी में मरीजों का दबाव करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। सांस के मरीज घर से बाहर निकलने से बचें। एन 95 मास्क लगाकर ही निकले। दूसरे मास्क से प्रदूषण से नहीं बच सकते हैं। प्रदूषण की वजह से सांस की नली में संक्रमण हो सकता है। इससे सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है। फेफड़े में भी परेशानी हो सकती है।

डॉ. बीपी सिंह, सांस रोग विशेषज्ञ

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