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एमआरआई में मंत्री के गनर की चिपकी पिस्टल, 40 लाख का नुकसान

-लोहिया संस्थान में एमआरआई जांच कराने पहुंचे थे खादी व ग्राम्य उद्योग मंत्री -जांच के दौरान पिस्टल लगाकर यूनिट में दाखिल हुआ गनर -मशीन के चुंबक में जा चुकी पिस्टल, जांच ठप लोहिया संस्थान में खादी एवं ग्राम्य उद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी के गनर की गुंडागर्दी ने मरीजों की जान सांसत में डाल दी। असल में चक्कर आने शिकायत के बाद शुक्रवार को मंत्री लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में पहुंचे थे। यहां डॉक्टरों ने सिर की एमआरआई जांच लिखी। एमआरआई जांच के लिए मंत्री मशीन पर लेटने जा रहे थे तभी गनर मुकेश कमर में पिस्टल लगाकर कर्मचारियों को धमकाता यूनिट में दाखिल हुआ। मशीन के हाईपावर चुंबक (मैगनेट) ने पिस्टल अपनी तरफ खींच ली। पिस्टल मशीन में चिपक गई। इससे मशीन का संचालन ठप हो गया। मंत्री का गनर हूं, एक मिनट में ठीक कर दूंगा दोपहर करीब डेढ़ बजे मंत्री सत्यदेव पचौरी लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में गए थे। डॉक्टरों ने मंत्री को एमआरआई जांच लिखी। करीब दो बजे मंत्री रेडियोलॉजी विभाग में दाखिल हुए। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें एमआरआई जांच के लिए लिटाया जा रहा था। तभी गनर मुकेश जहां मशीन लगी थी वहां दाखिल होने लगा। बाहर खड़े अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे रोकने की कोशिश की उसने कहां जानते नहीं हो। मैं मंत्री का गनर हूं। एक मिनट में ठीक कर दूंगा। इस पर कर्मचारियों का कहा कि मंत्री की देखरेख व जांच के लिए पैरामेडिकल अंदर मौजूद हैं। पर, गनर ने किसी की नहीं सुनी। गेट पर तैनात कर्मचारी को धक्का मारते हुए वह यूनिट में दाखिल हो गया। इससे पहले पैरामेडिकल स्टाफ कुछ समझ पाते वह मशीन के पास चला गया। मशीन में हाईपावर का चुंबक होता है। मुकेश की कमर में लगी करतूस से भरी पिस्टल मशीन के गैन्ट्री (मशीन के गोल हिस्सा) में चिपक गई। दो हफ्ते ठप रहेगी एमआरआई जांचें मशीन में चिपकी पिस्टल को कर्मचारियों ने छुड़ाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। आखिरकार मंत्री की जांच नहीं हो सकी। इसके बाद मंत्री की अल्ट्रासाउंड जांच हुई। वे चले गए। संस्थान प्रशासन ने किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचने के लिए एमआरआई यूनिट बंद करा दी। अधिकारियों का कहना है कि मशीन बनने के लिए इंजीनियर को सूचना दे दी गई है। कम से डेढ़ से दो हफ्ते लगेंगे मशीन ठीक होने में। 40 लाख का झटका डॉक्टरों का कहना है कि मशीन में चिपकी पिस्टल छुड़ाने के लिए गैन्ट्री में भरी हीलियम गैस निकाला जाएगा। करीब 23 हजार लीटर लिक्विड गैस होती है। इसे निकालने के बाद चुंबक का प्रभाव कम होगा। इसके बाद ही मशीन का संचालन हो सकेगा। मशीन को दुरुस्त करने में 30 से 40 लाख रुपये का खर्च आएगा। --------------------- गनर की गुंडागर्दी ने एमआरआई जांच कराने के मरीजों को संकट में डाला खादी एवं ग्राम्य उद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी के गनर की गुंडागर्दी से सैकड़ों मरीजों की एमआरआई जांच पर आफत आ गई है। संस्थान के न्यूरोलॉजी व न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती 10 से ज्यादा मरीज जांच के इंतजार में हैं। वहीं 100 से ज्यादा मरीजों की वेटिंग चल रही है। इन मरीजों को डेढ़ से दो महीने की तारीख दी गई है। लोहिया संस्थान के रेडियोलॉजी विभाग में एमआरआई जांच हो रही है। रोजाना 22 से 25 मरीजों की जांच हो रही है। 3500 रुपये में जांच हो रही है। दवा के साथ यह जांच लगभग पांच हजार रुपये में होती है। मरीजों के दबाव की वजह से जांच में वेटिंग चल रही है। 100 से ज्यादा मरीजों को जांच की तारीख दी गई है। जांच के इंतजार में मर्ज बढ़ रहा है। मशीन में पिस्टल चिपकने की घटना से जांचे पूरी तरह से ठप हो गई है। नतीजतन जांच के इंतजार में बैठे मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ेंगी। मरीज प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच कराने को मजबूर होंगे। प्राइवेट सेंटरों में यह जांच आठ से 10 हजार रुपये में हो रही है। निर्देशों को किया नजरअंदाज एमआरआई यूनिट गेट पर जांच से पहले क्या सावधानी बरते इसके निर्देशों का बोर्ड लगा हुआ है। इसके बावजूद गनर ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया। एमआरआई जांच से पहले मरीज के परिजन को पेन, पिस्टल, घड़ी, मोबाइल, सिक्के, चाबियां, सुनने का मशीन, गहने, पर्स, दांत (इम्प्लांट), लोहे की जिप, बटन, बेल्ट, जूते, क्रेडिट कार्ड, एटीएम कार्ड, हेयर पिन, क्लिप, सेफ्टी पिन, हुक्स आदि यूनिट के अंदर न ले जाने के निर्देश हैं।

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