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केजीएमयू में पैर की नसों में सूजन का लेजर से ऑपरेशन

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता यदि लंबे समय तक घुटने के नीचे के हिस्से में सूजन ठीक नहीं हो रही है। पैर की नसों में सूजन आ गई है। उसमें घाव ठीक नहीं हो रहा है तो संजीदा हो जाना चाहिए। यह लक्षण पैरों की नसों की बीमारी वेरीकोज हो सकती है। इस बीमारी का इलाज केजीएमयू में अब आसान हो गया है। बिना चीरा-टांके लेजर तकनीक से केजीएमयू में वेरीकोज से पीड़ित मरीजों का ऑपरेशन संभव हो गया है। यह जानकारी मोहाली से आए डॉ. राउल जिन्दल ने दी। वे गुरुवार को केजीएमयू के जनरल सर्जरी विभाग में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डॉ. राउल जिन्दल ने कहा कि वेरीकोज में पैर की नसें मोटी हो जाती हैं। ऐसा नसों में खून के धक्के जम जाते हैं। नतीजतन पैर की नसों से दिल को बिना ऑक्सीजन वाला खून पहुंचने की रफ्तार प्रभावित हो जाती है। नसों की दीवार में रूकावट की वजह से नसों में सूजन आ जाती है। सर्जरी विभाग के डॉ. अक्षय आनंद ने कहा कि लेजर से ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाला फाइवर छह से 10 हजार रुपये में बाजार में उपलब्ध है। केजीएमयू प्रशासन उसे मरीजों को सस्ता उपलब्ध करान की कोशिश की जाएगी। ताकि अधिक से अधिक मरीजों इलाज मुहैया कराया जा रहा है। लेजर से ऑपरेशन केजीएमयू सर्जरी विभाग के डॉ. जितेंद्र कुशवाहा ने कहा कि नसों में सूजन का पता लगाने के लिए कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाती है। इससे बीमारी का सटीक पता लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अभी तक नसों में सूजन से मरीज को निजात दिलाने के लिए चार से पांच जगहर चीरा लगाना पड़ता है। दो से तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद मरीज को अस्पताल में भी रूकना पड़ता है। पर, लेजर तकनीक ने ऑपरेशन आसान कर दिया है। जांच पड़ताल के बाद मरीज की नसे में निडिल से सुराख किया जाता है। फिर फाइवर का महीन पाइपनुमा छड़ नस में दाखिल कराते हैं। इसके बाद लेजर से नसों में जमे खून को हटा देते हैं। फाइवर को बाहर निकाल लेते हैं। नसें आपस में चिपक जाती है। जिससे दोबारा उनमें खून की दौड़ान नहीं होती है। 20 साल उम्र पार करने वाली 20 फीसदी आबादी पैर की नसों में सूजन की बीमारी से पीड़ित है। इनमें 50 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। जल्द आएगी मशीन केजीएमयू कुलपति डॉ. एमएलबी भट्ट ने कहा कि लेजर मशीन जल्द ही सर्जरी विभाग में स्थापित कराई जाएगी। इससे मरीजों को फायदा होगा। मरीजों को ऑपरेशन के बाद अस्पताल में बहुत ठहरने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। करीब 25 से 30 लाख रुपये की मशीन आएगी। अगले महीने से मरीजों को लेजर तकनीक से वेरीकोज का ऑपरेशन संभव हो जाएगी। तीन मरीजों के हुए ऑपरेशन सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिनव अरूण सोनकर ने कहा कि कार्यशाला में वेरीकोज पीड़ित तीन मरीजों के ऑपरेशन हुए। इनमें श्रषभ तिवारी, मूर्ति व रमन के पैरों के लेजर तकनीक से ऑपरेशन हुए। उन्होंने बताय कि रमन के दोनों पैरों का ऑपरेशन हुआ। कारण मोटापा लंबे समय तक खड़े होकर काम करना घंटों एक ही स्थान पर लंबे समय तक बैठना पैरों का नीला व काला पड़ना पैरों में सूजन घाव होना इलाज के बावजूद घाव का जल्द न भरना।

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