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बदलती जीवन शैली, देरी से शादी बढ़ा रही बांझपन

बदलती जीवन शैली, देरी से शादी बढ़ा रही बांझपन

संक्षेप:

Lucknow News - बांझपन के उपचार की नई प्रवृत्तियां विषयक सीएमई युवा कॅरियर के चक्कर में देर

Sun, 7 Sep 2025 07:16 PMNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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बांझपन के उपचार की नई प्रवृत्तियां विषयक सीएमई युवा कॅरियर के चक्कर में देर से कर ही शादी लखनऊ, संवाददाता। शहर के एक होटल में जुटी महिला रोग विशेषज्ञों ने बांझपन के उपचार, कारण और सामाजिक जिम्मेदारियों पर चर्चा की। अजंता होप सोसायटी ऑफ ह्यूमन रीप्रोडक्शन एंड रिसर्च, इंडियन फर्टिलिटी सोसायटी (आईएफएस) की ओर से आयोजित इंटरनेशनल होप सीएमई में देशभर से स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हुईं। सीएमई में भारत और विदेश से आए आईवीएफ विशेषज्ञों बीमारी और आधुनिक उपचार पर चर्चा की। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों ने कहा कि पुरुषों में बांझपन की समस्या भारत ही नहीं, पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रही है।

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इसके देरी से इलाज में परिणाम और अधिक खराब हो जाते हैं। इससे बच्चे पैदा होने में समस्या होती है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है कि युवा अपने कॅरियर के चक्कर में देरी से शादी कर रहे हैं। साथ ही तनाव और जीवनशैली में बहुत बदलाव भी बांझपन का एक प्रमुख कारण है। वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि बांझपन अब केवल महिलाओं की समस्या नहीं है। देश में हर छह में से एक दंपति निःसंतानता से जूझ रहा है और लगभग आधे मामलों में पुरुष कारक जिम्मेदार हैं। फिर भी पुरुष जांच कराने से हिचकते हैं और समस्या पर्दे के पीछे छिपी रह जाती है। 78 फीसदी दंपति मानसिक तनाव से गुजर रहे डॉ. गीता खन्ना ने जीवनशैली संबंधी विकारों-मोटापा, धूम्रपान, शराब, तनाव, देर से विवाह तथा चिकित्सीय कारणों जैसे पीसीओएस, फाइब्रॉइड, एंडोमीट्रियोसिस, बंद ट्यूब और घटती शुक्राणु गुणवत्ता को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में अचानक आईवीएफ केंद्रों की संख्या 60-65 तक पहुंच जाना बांझपन की बढ़ती महामारी को दर्शाता है। डॉ. खन्ना ने जोर देकर कहा कि जागरूकता की कमी के कारण महिलाओं पर अनुचित दोषारोपण होता है। उन्होंने बताया कि करीब 78% दंपति मानसिक तनाव से गुजरते हैं। चौंकाने वाली बात है कि 60 फीसदी महिलाएं पहले झांड़ फूंक, ओझा तांत्रिक के पास जाती हैं। इससे भी समस्या अधिक बढ़ जाती है। बांझपान बीमारी, कलंक नहीं उन्होंने कड़े नियम, रोगी परामर्श की मांग करते हुए कहा कि बांझपन एक बीमारी है, कलंक नहीं। जब तक पुरुष समय पर जांच के लिए आगे नहीं आएंगे, तब तक दंपतियों को चुप्पी में पीड़ा झेलनी पड़ेगी। आईवीएफ एक आशा देने वाली तकनीक है, हमें इसका जिम्मेदारी से उपयोग करना होगा। सीएमई का उद्घाटन सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने किया। विशिष्ट अतिथि रक्षामंत्री के प्रतिनिधि रिटायर आईएएस दिवाकर त्रिपाठी, आईएफएस के अध्यक्ष कर्नल डॉ. पंकज तलवार रहे। सीएमई में भारत और विदेश से आए आईवीएफ विशेषज्ञों में डॉ. सोनिया मलिक, डॉ. केडी नायर, डॉ. पूनम नायर, डॉ. कुलदीप जैन, यूएई से डॉ. यूसुफ अल्हाऊ आदि रहे। डॉ. गीता ने कहा कि प्रिजर्वेटिव और पैकेजिंग युक्त भोजन हमें बहुत नुकसान पहुंचा रहा है।