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पीजीआई में अप्रैल से नई लैब, टीबी का सटीक इलाज होगा

पीजीआई में अब टीबी की सटीक पहचान से मरीजों का पहले से बेहतर इलाज होगा। कल्चर और ड्रग सेंसिटिविटी जांच के साथ ही शोध होगा। इसके लिए संस्थान में...

पीजीआई में अप्रैल से नई लैब, टीबी का सटीक इलाज होगा
हिन्दुस्तान टीम,लखनऊThu, 22 Feb 2024 02:05 AM
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पीजीआई में अब टीबी की सटीक पहचान से मरीजों का पहले से बेहतर इलाज होगा। कल्चर और ड्रग सेंसिटिविटी जांच के साथ ही शोध होगा। इसके लिए संस्थान में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की देखरेख में क्षय रोग जैव सुरक्षा स्तर-3 (बीएसएल-3) लैब बनाई जा रही है। अप्रैल से इसमें जांच और शोध शुरू हो जाएंगे।

पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन का कहना है कि बीएसएल-3 लैब सिर्फ टीबी मरीजों के लिए होगी। यहां कल्चर-ड्रग संवेदनशीलता (सी-डीएसटी) और मॉलीक्यूलर परीक्षण के साथ डॉक्टर शोध करेंगे। कोरोना कॉल में सरकार ने पीजीआई में बीएसएल-3 लैब स्थापित करने की मंजूरी दी थी। लैब का नोडल माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. रिचा मिश्रा को बनाया गया है।

एक्सट्रीमली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का पता चलेगा

डॉ. रिचा मिश्रा ने बताया कि ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट से मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी और एक्सट्रीमली ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का पता लगाना आसान होगा। यह परीक्षण बीएसएल लैब में ही संभव है। ड्रग रेजिस्टेंट टेस्ट के बाद ही टीबी का सटीक उपचार संभव होगा।

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