
जल और वायु प्रदूषण की एनओसी लेना होगा महंगा, नवीनीकरण भी
Lucknow News - - प्रदूषण के स्तर और उद्योगों के पूंजी के निवेश की रकम के मुताबिक तय
प्रदेश में उद्योग लगाने वालों, टाउनशिप तैयार करने वालों और शहरी निकायों द्वारा चलाए जा रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) के लिए जल व वायु प्रदूषण का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना और उनका नवीनीकरण करवाना महंगा होगा। मंगलवार को योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश जल (मल और व्यावसायिक बहिस्राव निस्तारण के लिए सहमति) (तृतीय संशोधन) नियमावली, 2025 और उत्तर प्रदेश वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) (चतुर्थ संशोधन) नियमावली, 2025 को मंजूरी दे दी। वर्ष 2008 के बाद अब दरों में इजाफा किया जा रहा है। प्रदूषण के स्तर, उद्योगों में पूंजी निवेश की रकम और आदि के मुताबिक दरों को कई श्रेणियों में बांटा गया है।

वन एवं पर्यावरण विभाग के मुताबिक केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी में शुल्कों के दरें फिर से तय करने के निर्देश दिए थे। शुल्क की सात श्रेणियां तय की गई हैं। हर दो साल में दरों में 10 प्रतिशत का इजाफा किया जा सकता है। उद्योगों की लागत के मुताबिक शुल्क की न्यूनतम व अधिकतम सीमाएं तय की गई हैं। वहीं, प्रदूषण के स्तर को तीन हिस्से में बांटा गया है, हरा, नारंगी और लाल और इसके मुताबिक शुल्क का निर्धारण किया गया है। जल और वायु अधिनियम के मुताबिक अलग-अलग शुल्क तय किए गए हैं। 1000 करोड़ से ज्यादा का निवेश करने वाले सभी उद्योगों को अब एक स्लैब में लाया गया है। पहले 1000 करोड़ रुपये का निवेश करने वाले उद्योगों को एनओसी के लिए 1.5 लाख रुपये जमा करने होते थे और 75 हजार रुपये सालाना नवीनीकरण शुल्क था। अब उन्हें प्रदूषण का स्तर हरा होने पर 1.5 लाख, नारंगी होने पर 1.72 लाख और लाल होने पर 1.95 लाख रुपये होगा। इतना ही नवीनीकरण शुल्क भी हर साल लगेगा। उद्योगों के लिए जल व वायु प्रदूषण के एनओसी व उनके नवीनीकरण की नई दरें जल/वायु पूंजीगत निवेश आरंभिक व वार्षिक नवीनीकरण शुल्क हरी नारंगी लाल 1000 करोड़ से अधिक 5 5.75 6.5 500-1000 करोड़ 1.5 1.72 1.95 250-500 करोड़ 1 1.15 1.30 50-250 करोड़ 0.75 0.86 0.94 10-50 करोड़ 0.50 0.58 0.65 1-10 करोड़ 0.20 0.23 0.26 1 करोड़ तक 0.05 0.075 0.10 (नोट - शुल्क लाख रुपये में है।) उत्सर्जित और अपचारित मल के आधार पर लगेगा शुल्क जल और वायु प्रदूषण की एनओसी अब शहरी निकायों की श्रेणियां पर नहीं बल्कि उनके द्वारा उत्सर्जन के आधार पर होगी। इसे 10 श्रेणियों में बांटा गया है। न्यूनतम उत्सर्जन 10 केएलडी रखा गया है। इसमें स्थानीय निकाय और आवासों के लिए 5000 रुपये और आवासीय इसे इतर भवनों के लिए 7500 रुपये लिया जाएगा। इसी तरह 25 एमएलडी से अधिक के लिए स्थानीय व आवासीय भवनों के लिए चार लाख रुपये जबकि आवासीय से इतर भवनों के लिए 6 लाख रुपये लिए जाएंगे। स्थापना के लिए लिया जाना वाला शुल्क वार्षिक संचालन का डेढ़ गुना होगा। इसे भी निवेश की श्रेणी के आधार पर बांटा गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि दरों में हर दो साल में पांच प्रतिशत का इजाफा होगा।

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