बाल मन को छूती कहानियां बच्चों के विकास में सहायक बनेगी
रविवार को प्रेस क्लब में नीलम राकेश की चार कृतियों का विमोचन हुआ। वरिष्ठ साहित्यकारों ने उनकी रचनाओं की सराहना की। मुख्य अतिथि डॉ. विद्या बिंदु सिंह ने इसे बाल साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण घटना बताया। कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकारों ने नीलम राकेश की मौलिकता और बच्चों के विकास में योगदान की चर्चा की।

प्रेस क्लब में नीलम राकेश की चार कृतियों का विमोचन रविवार को हुआ। कार्यक्रम का आरंभ अलका अस्थाना की स्वरचित वाणी वंदना से हुआ। जिसे उन्होंने स्वयं ही स्वर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सूर्यकुमार पांडेय ने कहा कि नीलम राकेश की रचनाएं बच्चों के मन के बहुत करीब होती हैं। उनकी चार किताबों का एक साथ आना किसी उपहार से कम नहीं है। मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह ने कहा नीलम राकेश जैसी वरिष्ठ साहित्यकार की लेखनी से निकलकर चार कृतियों का बाल साहित्य जगत को समृद्ध करना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना है।
साहित्यकार डॉ. अमिता दुबे ने कहा कि लेखिका लोकार्पित चारों कृतियां महत्वपूर्ण हैं। किंतु चित्रकथा दुनिया रंग-बिरंगी देख कर मेरा मन अत्यंत प्रसन्न है क्योंकि चित्रकथा की नन्हे मुन्ने बच्चों के लिए महती आवश्यकता है। बाल मन के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान होता है। वरिष्ठ साहित्यकार संजीव जायसवाल लेखिका की रचनाओं की मौलिकता और उसमें जिज्ञासा की छौंक बाल पाठकों को आपकी रचना की प्रतीक्षा करने के लिए बाध्य करता है। बाल उपन्यास जासूस चारु उनकी श्रेष्ठ रचनाओं में से एक है। डॉ करुणा पांडे ने कहा बाल कहानी संग्रह फुदकू का नव वर्ष निश्चित रूप से बालमन का मनोरंजन करने के साथ उनके चरित्र निर्माण में भी सहायक होगा। अलका प्रमोद के संचालन में हुए कार्यक्रम में डा. अंजना मिश्रा, डॉ. अरविंद मोहन, नम्रता मोहन, अनामिका श्रीवास्तव, मंजु श्रीवास्तव, केवल प्रसाद सत्यम समेत अन्य शामिल रहे।
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