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परजीवी पौधों के नुकसान पहुंचाने वाले जीन्स की पहचान कर बढ़ाई जा सकती है उत्पादकता

- टमाटर के पौधे पर अमरबेल से होने वाले नुकसान पर शोध में आई बात सामने - इंटरनेशनल प्लांट फिजियोलॉजी कांग्रेस का समापनलखनऊ। निज संवाददाताअमरबेल परजीवी पौधा विभिन्न पौधों व फसलों को नुकसान पहुंचाता है। टमाटर के पौधे पर किये गए शोध कार्य में ऐसे जीन्स को पहचानने की कोशिश की है जो इस परजीवी पौधे द्वारा किसी पौधे पर आक्रमण के समय क्रियाशील रहते हैं। ऐसे जीन्स की पहचान हो जाने से भविष्य में पौधों में परजीवी पौधों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में सहायता मिलेगी। जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ाई जा सकेगी। कैलीफोर्निया विवि अमेरिका की डॉ. नीलिमा सिन्हा ने परजीवी पौधे अमरबेल (कस्कुटा) व इससे प्रभावित होने वाले पौधों के परस्पर संबंधों पर की गई रिसर्च पर चर्चा करते हुए यह जानकारी दी। दूसरे सत्र में दिल्ली विवि के डॉ. अखिलेश त्यागी ने धान के पौधों में विकास की अवस्था के दौरान जीनों की क्रियाओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया। फ्रांस के टैन्गाई लाफार्ज ने उत्पादकता में वृद्धि करने के लिए पौधों में बनने वाले भोज्य पदार्थों के भंडारण, वितरण व प्रयोग के नियंत्रण पर चर्चा की। एनबीआरआई के डॉ. पीके सिंह ने पौधों में आनुवंशिक सुधार के लिए अपुष्पी पौधों से नवीन कीटनाशक प्रोटीनों की खोज की दिशा में सफेद मक्खी प्रतिरोधी कपास के विकास पर किये गए शोध को प्रस्तुत किया। किसानों के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनें वैज्ञानिक किसानों के पास खुद वैज्ञानिक जाएं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने व समझने का प्रयास करें। इसके साथ ही इन समस्याओं का दूर करने का रास्ता भी सुझाएं। ताकि फसलों की गुणवत्ता के साथ ही उत्पादकता को दुगुना किया जा सके। पादक उत्पादकता बढ़ाने के लिए जैव-प्रौद्योगिकी उपायों पर आयोजित विशेष सत्र में पद्मश्री डॉ. अजय परीदा ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए इसका आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अपने शोध कार्यों से किसानों की आमदनी दुगुनी कर उनके जीवन में खुशहाली ला सकते हैं। इस विशेष पैनल सत्र में प्रो. उते होकर, डॉ. आसफ आहरोनी, डॉ. पीवी साने, डॉ. पीके घोष, प्रो. अखिलेश त्यागी व डॉ. पीके सिंह ने भी अपने विचार रखे। तीन युवा वैज्ञानिकों व 10 शोधार्थी हुए पुरस्कृत संयोजक डॉ. प्रबोध त्रिवेदी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन युवा वैज्ञानिक व पोस्टर प्रस्तुति सत्र का आयोजन किया गया। युवा वैज्ञानिक सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए आईआईसीबी कोलकाता के डॉ. रिधि दत्ता, जामिया मिलिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली डॉ. मो. इकबाल रजा खान, आईएआरआई, नई दिल्ली के डॉ. वेदा कृष्णा को क्रमशः प्रथम, द्वितीय व तृतीय पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। समापन समारोह में कार्यक्रम की सह-संयोजक डॉ विधू साने ने संगोष्ठी का सारांश प्रस्तुत किया।

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