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टेरिस विटेटा पौधा भूमि से हानिकाररक आर्सेनिक तत्व को करता है दूर

- लगभग पांच वर्ष में ऐसी जमीनों का जैव उपचार करने की है क्षमता- सम्मेलन के तीसरे दिन पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए जैव उपचार पर हुई चर्चालखनऊ। टेरिस विटेटा पौधे में जमीन के अंदर पाए जाने वाले हानिकारक तत्व आर्सेनिक को दूर करने की अत्यधिक क्षमता पाई गई है। ऐसे इलाके जहां जमीन में अधिक मात्रा में आर्सेनिक पाया जाता है वहां इन पौधों को लगाने पर लगभग पांच वर्षों में भूमि की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। फ्लोरिडा विवि की डॉ. लेना मा ने गुरुवार को पौधों के माध्यम से पर्यावरण की जैव निगरानी एवं जैव-उपचार पर आधारित सत्र में आर्सेनिक (संखिया) दूषित भूमि के जैव उपचार पर चर्चा करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि टेरिस विटेटा एक फर्न है जो भारत में भी काफी पाया जाता है। इस पौधे में आर्सेनिक दूषित भूमि के जैव-उपचार की प्रबल क्षमता होती है। डॉ. मा को विश्व में आर्सेनिक अति-संचयकर्ता पौधे टेरिस विटेटा की जानकारी देने के लिए जाना जाता है। दूसरे सत्र में पर्यावरणीय प्रदूषण के प्रति पौधों की प्रतिक्रिया संबंधी सत्र में अवेरो विवि पुर्तगाल के डॉ. नासिर अंजुम ने पर्यावरण पर मरकरी (पारा) के प्रदूषण पर चर्चा की। उन्होंने समुद्र तटीय क्षेत्रों में खारे पानी के दलदली इलाकों में पाए जाने वाले पौधों द्वारा मरकरी प्रबंधन के विषय में जानकारी दी। बताया कि ये पौधे ऐसे प्रदूषण को सहन करने की क्षमता रखते हैं। कृष्णा मिश्रा ने मनुष्यों के बालों को जैव-मार्कर की तरह प्रयोग करते हुए गाड़ियों के धुएं से होने वाले भारी धातु प्रदूषण के आंकलन पर चर्चा की। भावना पाठक ने पर्यावरण के लिए हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों का सूक्ष्म जीवों द्वारा जैव-उपचार के विषय में चर्चा की। इसके अलावा सम्मेलन में पौधे के पराग कणों पर गाड़ियों से निकले प्रदूषण के प्रभाव पर चर्चा की गई।

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