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नाटक में दिखी अपनों को तकलीफ देने का परिणाम

- बीएनए में साहित्यकार राज कृष्ण मिश्र की रचना वजूद पर नाटक का मंचन लखनऊ। निज संवाददाताजब घर का मुखिया ही अपने परिवार और पत्नी को छोड़कर बाहर सुख की तलाश करता है तो उस घर के वजूद के साथ साथ उसका खुद का वजूद भी संकट में पड़ जाता है। बुधवार को बीएनए में इंस्टीटयूट ऑफ क्रिएटिव स्टडी की ओर नाट्य समारोह में साहित्यकार राज कृष्ण मिश्र की रचना वजूद पर नाटक का मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत भंडारी नाम के एक व्यक्ति से होती है जिसके परिवार में हमेशा खुशी का माहौल रहता है। एक दिन भंडारी को पता चलता है कि की उसकी पत्नी नीलम मां बनने वाली है। ऐसे में पत्नी का ख्याल रखने के बजाए वह अपनी प्यास को शांत करने के लिए नीलम का साथ छोड़ देता है। वो क्लब और होटलों में पार्टी मनाने में मशगूल हो जाता है। इस दौरान उसको एहसास तक नहीं होता कि वो धीरे धीरे घर को तबाह करने वाले तूफान को उठा रहा है जिसमें एक दिन उसका अपना वजूद ही खत्म हो जायेगा। इस मौज मस्ती के बीच भंडारी को अटैक पड़ता है और वो अपाहिज हो जाता है। मगर तब तक बहुत देर हो जाती है उसका अपना बनाया हुआ स्वर्ग जैसा घर ही उसको नरक लगने लगता है। नाटक में राहुल, आशुतोष, विनीता,करिश्मा आदि ने अभिनय किया।

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  • Web Title:natak