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भूजल दोहन की बनेगी नीति, बर्बादी पर लगेगा दण्ड

जलकल के लिए अलग से बजट सदन के दौरान पार्षदों ने अंधाधुंध भू-जल दोहन का मामला प्रमुखता से उठाया। इस सबंध में नीति बनाने व दण्ड का प्रावधान करने की मांग की। महापौर संयुक्ता भाटिया ने सहमति जताते हुए जलकल महाप्रबंधक को नीति बनाने का आदेश दिया। सदन से पास होने के बाद उसके शासन को भेजा जाएगा।

महापौर ने कहा कि भू-जल दोहन के साथ पानी की बर्बादी रोकने के लिए एक उपसमिति बनाई जाएगी। उसी की देखरेख में नियमावली बनेगी। भाजपा पार्षद दिलीप श्रीवास्तव ने कहा कि जल दोहन व बर्बादी पर अब तक कोई ठोस नियमावली नहीं बनाई गई है। हर कोई बोरिंग कराकर सड़क, कार व नाली की सफाई कर रहा है। यही स्थिति रही तो लखनऊ वासियों को आने वाले दिनों में पानी के भीषण संकट से जूझना पड़ेगा। जब तक दण्ड का प्रावधान नहीं होगा तब तक इसपर रोक नहीं लग सकेगी। उनकी इस मांग का संतोष राय, सुशील तिवारी पम्मी, सपा पार्षद दल के नेता यावर हुसैन रेशू, अजय दीक्षित, जीतू यादव, अरविंद यादव, कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी, गिरीश मिश्रा, अमित चौधरी समेत सभी ने एक स्वर में समर्थन किया।

नगर निगम में शामिल हो जलकल का बजट

जलकल का बजट अलग बनने को लेकर सदन के शुरुआत में ही हंगामा हो गया। कांग्रेस पार्षद गिरीश मिश्र ने कहा जब नगर निगम में जलकल शामिल हो गया है तो वित्तीय अधिकार अलग क्यों किया गया है। नगर निगम के बजट में ही जलकल के बजट को क्यों शामिल नहीं किया जा रहा है। जीएम जलकल एसके वर्मा ने इसके लिए अध्यादेश का हवाला दिया। इसके बाद बैलेंस सीट को लेकर पार्षदों ने अधिकारियों पर पूरी तरह तैयार न होने का आरोप लगाया। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद रमेश कपूर बाबा ने कहा कि यह सदन की अवमानना है। इसके लिए दोषी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

अमृत योजना की सीवर लाइन पर सवाल

पार्षदों ने अमृत योजना के तहत पड़ रही सीवर लाइन व कनेक्टिंग चैम्पबर की गुणवत्त व मानक पर सवाल उठाया। कहा कि पिछले तीस वर्षों शहर की आबादी दोगुनी हो चुकी है। ऐसे में सीवर लाइन भी उसी के हिसाब से पड़नी चाहिए। जहां 12 इंच डाया की सीवर लाइन पड़ी है वहां अमृत योजना में छह इंच डाया की सीवर लाइन डाली जा रही है। जेएनयूआरएम योजना की तरह इसमें भी लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ेगी। बिना नगर निगम व जलकल को बताए जल निगम अपनी मर्जी से काम कर रहा है। महापौर ने कहा कि जहां भी नई सीवर लाइन डाली जा रही है उसकी जानकारी वार्ड के पार्षदों को जरूर दी जाए। इसके लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।

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