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चौपट हुआ नगर निगम का चौपड़ अस्पताल

-नगर निगम की अन्य डिस्पेंसरियां भी पड़ी है बीमार

-व्यवस्थायें नदारद, मरीज तो यहां आते ही नहीं हैं

-सौ साल से अधिक जर्जर भवन, पुताई तक नहीं हुई

-सीलन के कारण यहां रखा फर्नीचर भी हो गया खराब

लखनऊ। पल्लव शर्मा

सौ साल से अधिक पुराना हो चुका जर्जर भवन, पुताई भी आज तक नहीं हुई। सीलन से खराब हो रहा फर्नीचर, गंदे और बदबूदार बाथरूम। मरीजों के लिए टूटी कुर्सियां। कुछ ऐसा हाल है नगर निगम के हजरतगंज स्थित चौपड़ अस्पताल और गणेशगंज स्थित डिस्पेंसरी का। यहां डाक्टर तो तैनात हैं लेकिन मरीज आते ही नहीं हैं। यहां काम करने वाले बताते हैं कि किसी तरह बस काम चलाया जा रहा है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग का काम इन डिस्पेंसरियों की ओर देखने से अधिक शहर में जगह-जगह चूना छिड़कवाना और सफाई कराना रह गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के लिये बनाये गये अस्पताल और डिस्पेंसरी पर कभी ध्यान ही नहीं दिया गया।

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जर्जर हो चुकी चौपड़ अस्पताल की बिल्डिंग

हजरतगंज में नगर निगम के चौपड़ अस्पताल के नाम से नगर निगम की डिस्पेंसरी सौ साल पुराने मेटरनिटी होम नाम की बिल्डिंग में चल रही है। इस जर्जर बिल्डिंग में तीन अलग-अलग किस्म के अस्पताल संचालित हैं। इसलिये इसे चौपड़ अस्पताल नाम से जाना जाता है। इनमें से एक सीतापुर के ब्रांच का आई अस्पताल, दूसरा बाल विकास महिला चिकित्सालय और तीसरा चौपड़ अस्पताल नगर निगम के नाम से डिस्पेंसरी संचालित है। यहां नगर निगम की डॉ रश्मि गर्ग और पर्चा बनाने वाले एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। यह डिस्पेंसरियां सीएमओं की ओर से संचालित हो रहे हैं लेकिन व्यवस्था नगर निगम ही संभाल रहा है। नगर निगम के प्रयास से किसी तरह यह डिस्पेंसरी चल रही है। चौपट व्यवस्था के कारण यहां मरीज अब न के बराबर रह गये हैं। इमरजेंसी सेवा यहां है नहीं। बिल्डिंग जर्जर है पुताई तक नहीं हुई है। पूर्व में नगर निगम डिस्पेंसरी पर तीन चौकीदार तैनात हुआ करते थे आज एक भी नहीं है। पिछले 15 सालों से कोई भी चौकीदार यहां तैनात नहीं है जिससे चौपड़ अस्पताल में रहने वाले स्टाफ और नगर निगम कर्मचारियों को समस्या हो रही है।

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गणेशगंज रोड स्थित डिस्पेंसरी भी बहाल

एक बड़ी आबादी के बीच गणेशगंज रोड पर स्थित इस अस्पताल का हाल भी काफी खराब है। रखरखाव की ओर नगर निगम प्रशासन को कोई ध्यान नहीं है। आसपास रहने वाले लोगों को भी इस अस्पताल से कोई लाभ नहीं है। नगर निगम अधिकारियों से इस बाबत बात करने पर वो कोई जवाब देने को भी तैयार नहीं है। इसी रोड पर आगे चलने पर नगर निगम का नाका हिण्डोला यूनानी अस्पताल भी है । महापौर डॉ दिनेश शर्मा ने इस अस्पताल का शिलान्यास वर्ष 2007 में किया था। इसका रिनोवेशन भी हुआ था लेकिन आज भी इससे आम लोगों को कोई लाभ नहीं हो रहा है।

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नगर निगम की डिस्पेंसरी सीएमओ संचालित कर रहा है। यहां का भवन काफी जर्जर हो चुका है। हमारा प्रयास रहता है कि इसका लाभ लोगों को मिलता रहे। कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिये प्रयास जारी हैं।

डॉ रश्मि गर्ग, चिकित्साधिकारी

सिटी प्रोजेक्ट ऑफिसर, शहर मिशन प्रबंधन इकाई

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