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मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: तिहाड़ में लिखी गई थी बजरंगी की हत्या की इबारत

मुन्ना बजरंगी हत्याकांड: तिहाड़ में लिखी गई थी बजरंगी की हत्या की इबारत

बागपत जेल में मारे गए मुन्ना बजरंगी की हत्या की इबारत छह साल पहले ही दिल्ली के तिहाड़ जेल में ही लिख दी गई थी। वर्ष 2012 में यह सब उसी दिन से शुरू हो गया था जब तिहाड़ की बैरक नम्बर चार में बंद रहे बजरंगी और राठी के बीच झगड़ा हो गया था। तब हुए झगड़े के बाद सुनील राठी को हाई सिक्यारिटी बैरक और मुन्ना को सामान्य बैरक में कर दिया गया था। तब दोनों ने एक दूसरे को देख लेने की धमकी दे डाली थी।
तिहाड़ जेल में एक साल तक दोनों साथ रहे और तनातनी चलती रही। इसके बाद राठी रुड़की जेल गया और बजरंगी दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। वर्ष 2015 में बागपत जेल के तैयार होते ही सुनील राठी ने बजरंगी को मारने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया था। इसी कड़ी में वह सबसे पहले खुद को बागपत जेल में स्थानान्तरित करने में जुट गया। पर, बजरंगी इसमें बाधा बनने लगा। सूत्र बताते हैं कि बजरंगी को आभास था कि उसके एक बड़े विरोधी का यह साथी उस         पर हावी हो सकता है। 
सुनील के साथी को झांसी जेल से हटवाया:

बजरंगी जब झांसी जेल में बंद हुआ तो उसे पता चला कि वहां सुनील का बेहद खास साथी भी बंद है। बस, वह और सतर्क हो गया। बजरंगी ने एक जेल अधिकारी पर दबाव बनवाकर सुनील के गुर्गे को झांसी जेल से दूसरी जगह भिजवा दिया। उसे लगा था कि यह बंदी उसके हर मूवमेंट को सुनील राठी तक पहुंचा रहा है। इस बीच ही सुनील का एक और साथी अपनी जमानत कटवा कर झांसी जेल पहुंच गया। जिससे बजरंगी और सतर्क हो गया। यह उस वक्त की बात है जब सुनील राठी मुजफ्फरनगर जेल में बंद था। 
सुनील भी तैयारी करता रहा:

बजरंगी को चारों खाने चित करने के लिए सुनील भी अपनी तैयारी करता रहा। तीन साल पहले जब बागपत जेल बनी तो उसने सबसे पहले जेल अफसरों पर दबाव बनवाया कि उसे बागपत जेल में शिफ्ट कर दिया जाए। जब उसकी नहीं सुनी गई तो उसने कोर्ट में अर्जी दे दी। उसके अधिकतर मुकदमें बागपत में दर्ज होने के कारण कोर्ट ने अर्जी पर बागपत जेल में रखने का आदेश  दे दिया। 
इस बीच ही वर्ष 2016 में बजरंगी के साले पुष्पजीत और 2017 में बेहद करीबी मो. तारिक की लखनऊ में हत्या हो गई। इससे बजरंगी खौफजदा हो गया और राठी को और मजबूती मिल गई।
बागपत जेल में उसका ही सिक्का:

बागपत जेल पहुंचते ही वह मजबूत हो गया। यहां उसका ही सिक्का चलने लगा। सीसी कैमरे ज्यादा थे नहीं, जो थे वह भी सही ढंग से काम नहीं कर रहे थे। सुरक्षाकर्मी भी कम और आने-जाने वालों पर ज्यादा रोकटोक नहीं करते थे। 
बाहुबली नेता भी पहुंचा था जेल:

पूर्वांचल के एक बाहुबली नेता से सुनील के बेहद करीबी रिश्ते रहे। जब सुनील के पिता टिकरी नगर पंचायत के अध्यक्ष थे, तब उस नेता के पास उसका बहुत आना जाना था। ये नेता कुछ समय पहले बागपत जेल में सुनील से मिलने गया था।
पेशी के समय हमले का डर
बागपत जेल में पूर्वांचल के माफिया डॉन प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद दूसरे बदमाश ही नहीं पुलिस भी खौफ में है। पुलिस को डर है कि पेशी के लिए एक से दूसरे जिले आने-जाने वाले बदमाशों पर रास्ते में हमला हो सकता है। मेरठ के एसपी सिटी रणविजय सिंह ने ऐसी आशंका जताते हुए अफसरों को पत्र लिखा है। शुक्रवार को मेरठ की अदालतों में छह कुख्यात बदमाशों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पेश किया गया। बजरंगी की हत्या के बाद बदमाशों में खूनी संघर्ष की भी आशंका है। 
हत्या में राठी के साथ कोई दूसरा भी था शामिल 
जेल के सेफ्टी टैंक से एक पिस्टल, दो मैगजीन और 22 कारतूस मिले हैं। इससे पता चलता है कि वारदात में एक से अधिक पिस्टल का इस्तेमाल किया गया है, हालांकि अफसर अभी भी दावा कर रहे हैं कि वारदात में एक ही पिस्टल का इस्तेमाल हुआ है। हत्या के बाद अधिकारियों को मौके से गोली के दस खोखे बरामद हुए थे। जेल में बंद कुख्यात सुनील राठी ने हत्या करना स्वीकार करते हुए वारदात में प्रयुक्त पिस्टल को सेफ्टी टैंक में फेंकना बताया गया था। इसके लिए पुलिस ने जेल में ही सफाई मशीन मंगवाई थी और करीब 11.30 बजे टैंक की सफाई कराना शुरू कर दिया था। रात करीब 8 बजे से सेफ्टी टैंक से मैगजीन लगी पिस्टल मिली थी। इसमें पांच कारतूस थे। इसके अलावा लाल कलर की पॉलीथिन में 17 कारतूस और एक मैगजीन बरामद हुई थी। राठी ने देखकर कहा था कि यही वो पिस्टल है जिससे उसने मुन्ना बजरंगी का खून किया हैं। राठी ने अकेले ही इस पिस्टल से वारदात को अंजाम देने की बात कहीं थी, लेकिन जिस तरह से दो मैगजीन और इतनी संख्या में मिले कारतूस से पता चलता है कि इस घटना में और भी पिस्टल का इस्तेमाल किया गया है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि वारदात में कुछ और लोग भी शामिल रहे होंगे। 
पांच दिन में अढ़ाई कोस भी नहीं चल पाई मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच
जेल में कुख्यात मुन्ना बजरंगी की हत्या को पांच दिन गुजर गए,लेकिन अभी तक पुलिस की जांच जहां से शुरू हुई थी वहीं पर अटकी हुई है। हत्याकांड से जुड़े कई सवालों में पुलिस एक का भी जवाब तलाश नहीं पाई है। उधर मुन्ना के परिजनों में इस बात को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।  कुख्यात मुन्ना बजरंगी को रविवार की रात जिला जेल में झांसी से लाया गया था। उन्हें पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी के मामले में बागपत कोर्ट में पेश होना था। सोमवार सुबह मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एसपी जयप्रकाश की अगुवाई में हत्याकांड की जांच चल रही है। पुलिस कई लाइन पर काम कर रही है। जेल के अंदर पिस्टल कैसे पहुंची? सुनील राठी ने मुन्ना को क्यो मार? सुनील राठी के पीछे इस कांड में कौन लोग शामिल थे? सुनील के साथ जेल के अंदर हत्याकांड में कौन शामिल था? आदि बिंदुओं पर पुलिस जांच कर रही है। एसपी जयप्रकाश ने बताया कि मामले की जांच हो रही है। पुलिस अफसरों को उम्मीद है कि जल्द ही इस हत्याकांड का खुलासा हो सकेगा।  

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  • Web Title:Munna Bajrangi massacre: Written in Tihar Bajrangi murder case