2.17 लाख के बकाये पर नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की की नौबत

Mar 10, 2026 07:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
share

Lucknow News - – सिविल कोर्ट के आदेश पर पुलिस और अमीन की टीम पहुंची, तीन घंटे तक

2.17 लाख के बकाये पर नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की की नौबत

महज 2.17 लाख रुपये के बकाये भुगतान के विवाद ने मंगलवार को नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सिविल कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस और न्यायालय के अमीन की टीम लालबाग स्थित नगर आयुक्त कार्यालय की कुर्की करने पहुंच गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से नगर निगम मुख्यालय में हड़कंप मच गया और करीब तीन घंटे तक अफसरों और कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही। कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहुंचे अमीन और पुलिस बल ने जब कार्यालय का सामान बाहर निकालना शुरू किया तो कर्मचारियों ने इसका विरोध किया। स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल भी आ गया।

बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप और आश्वासन के बाद टीम कार्रवाई रोकी गई। फिर भी काफी देर तक कहासुनी होती रही।---------कुर्की की कार्रवाई से मचा हड़कंपदोपहर करीब तीन बजे सिविल कोर्ट के आदेश के साथ हजरतगंज पुलिस और कोर्ट के अमीन नगर निगम मुख्यालय पहुंचे। उनके साथ वादी संस्था के वकील भी मौजूद थे। टीम ने पहले अधिकारियों से बातचीत कर भुगतान के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब न मिलने पर कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी। नगर आयुक्त के कक्ष से टेबल, कुर्सियां, सोफा और इनवर्टर तक बाहर निकाल दिए गए। कर्मचारियों ने इसका विरोध किया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।-------2019 के विवाद से जुड़ा मामलादरअसल, मेसर्स गंगा संस्थान और नगर निगम के अधीन डूडा के बीच पुराना विवाद चल रहा है। संस्था के अधिवक्ता विवेक मिश्रा के अनुसार फर्म कैसरबाग क्षेत्र में एक शेल्टर होम संचालित करती थी। वर्ष 2019 में नगर निगम ने संस्था का नवीनीकरण समाप्त कर दिया, जिसके बाद बकाया भुगतान भी रोक दिया गया। संस्था ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां सुनवाई के बाद कोर्ट ने नगर निगम को 2.17 लाख रुपये के बकाये के साथ छह महीने का ब्याज देने का आदेश दिया। भुगतान न होने पर अदालत ने नगर निगम कार्यालय के सामान की कुर्की का आदेश जारी कर दिया।-----कोर्ट ने सामान कुर्क करने के दिए निर्देशसिविल कोर्ट के आदेश में 10 कंप्यूटर, 10 मेज, 50 कुर्सियां और 25 अलमारियां कुर्क करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही डिक्री धारक को कब्जा दिलाने के लिए पुलिस सुरक्षा भी उपलब्ध कराने को कहा गया था।------अफसरों के हस्तक्षेप से टली कार्रवाईकरीब तीन घंटे चले हंगामे के दौरान पुलिस और वादी पक्ष के वकीलों के बीच भी बहस हुई। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप और कोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करने की जानकारी देने पर टीम शाम को वापस लौट गई। बाहर निकाला गया सामान फिर से नगर आयुक्त के कक्ष में रख दिया गया।------अपर नगर आयुक्त ने की नोटिस की अनदेखीइस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक लापरवाही भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुर्की की सूचना एक दिन पहले संबंधित पुलिस चौकी ने अपर नगर आयुक्त ललित कुमार को दे दी थी, लेकिन यह जानकारी समय पर नगर आयुक्त और विधि विभाग तक नहीं पहुंची। मामले में अपर नगर आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इन्हीं अपर नगर आयुक्त की वजह से एक महीने तक नगर निगम की लिफ्ट खराब पड़ी रही। इन्होंने काम में अड़ंगा लगा दिया था। जिससे महापौर से लेकर तमाम बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। मेयर की धमकी के बाद सोमवार की रात में लिफ्ट सही हुई।

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।