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मजलिसे गम है शाहे हुदा की, आज पहली है माहे अजा की

अकीदत के साथ निकाला गया आसिफी इमामबाड़े से शाही जरी का जुलूसदेर रात छोटे इमामबाड़े पर हुआ समाप्त सैकड़ों की संख्या में पहुंचे अजादारों ने दिया इमाम को पुरसा लखनऊ। कार्यालय संवाददाताफिजां में गूंजती या हुसैन की सदाएं, अजादारों की अश्कबार आंखे और लबों पर नौहा और गिरया पहली मोहर्रम को आसिफी इमामबाड़े से कुछ इस रिवायती अंदाज में शाही जरी का जुलूस निकाला गया। जो देर रात बड़े इमामबाड़े पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे व नौजवान इमाम हुसैन को पुरसा देने पहुंचे। हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से जुलूस में 21 फिट की मोम की शाही जरी व 15 फिट की अभ्रक की जरी जियारत के लिए बनवाई गई थी। शाही जरीह के जुलूस में शहनाई पर बजती ‘मजलिसे गम है शाहे हुदा की, आज पहली है माहे अजा की धुन फिजां को गमगीन बना रही थी। इसे सुन कर अजादारों की आंखों से आंसू निकलना शुरू हो गए। बच्चे व नौजवान हाथों में अलम और लबों पर या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस में चल रहे थे। जुलूस के आगे ताज, शेरे दहां, सूरज ओर चांद से सजे हुए 5 हाथी और एक दर्जन ऊंट पर लोग हाथों में काले झंडे लेकर चल रहे थे। उसके पीछे मातमी बैंड, चोबदार, आलम हजरत अब्बास लिए लोग या हुसैन की सदाएं बुलंद कर रहे थे। जुलूस से पहले हुई मजलिस को मौलाना मोहम्मद अली हैदर ने खिताब किया। इसके बाद अवध के रिवायती अंदाज में बड़ी शान-ओ-शौकत से शाही जरी का जुलूस निकाला गया। जुलूस में दूर दराज से आए अजादारों के लिए कई मोमिनीन ने चाय और पानी की सबीलों को भी इंतजाम किया था। इसमें आसिफदौला पार्क से लेकर घंटाघर और छोटे इमामबाड़े तक कई चाय पानी और तबरुक की सबीले लगाई गई थी। इसके अलावा हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से भी जुलूस में चाय व पानी की सबील की गई। अजादारों ने दिया इमाम को पुरसाजुलूस में आगे-आगे शहनाई और नकारों पर मातमी धुनें बज रही थी तो पीछे पीएसी व होमगार्ड के जवान बैंड पर मातमी धुनें बजा रहे थे। जुलूस के बीच मार्सियाख्वान अपनी दर्द भरी आवाज ‘बेकसो बेवतनों साबिरो शाकिर आए। हक पर मरने के लिए दीन के नासिर आए, दश्ते गुरबत में जो यसरब के मुसाफिर आए, गुरबते अहमदे मुरसल के मुजाबिर आए पढ़ना शुरू किया तो अजादारों की आंखे अश्कबार हो गई। जुलूस के साथ चल रहे हाथी और ऊंट जुलूस के शाही होने की गवाही दे रहे थे। जुलूस में सबसे पीछे मोम और अभ्रक की शाही जरीह थी। इमामबाड़े से निकला शाही जरीह का जुलूस अजादारी रोड होता हुआ देर रात छोटे इमामबाड़े पर समाप्त हुआ।

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  • Web Title:mohrram juloos