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मोहर्रम की तैयारियां शुरू शाही जरी का काम हुआ पूरा

पहली मोहर्रम को बड़े इमामबाड़े से निकाली जाती है मोम की शाही जरीकर्बलाओं व इमामबाड़ों में चल रही है मोहर्रम की तैयारियां लखनऊ। कार्यालय संवाददाताहुसैनाबाद एंड एलाइड ट्रस्ट मोहर्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है। ट्रस्ट की ओर से बनवाई जा रही शाही जरी का काम भी 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। पहली मोहर्रम को बड़े इमामबाड़े से निकलने वाले शाही जरी के जुलूस में इसे निकाला जाता है। इस बार करीब 2.55 लाख रुपए में जरी बन कर तैयार हुई। इसमें एक बड़ी व दो छोटी जरियां शामिल हैं। इसके साथ ट्रस्ट की ओर से सात मोहर्रम को शाही मेहदी का जुलूस निकाला जाता है, जो हुसैनाबाद स्थित छोटे इमामबाड़े पहुंच कर सम्पन्न होता है। इन जुलूसों के अलावा ट्रस्ट के अधीन आने वाले इमामबाड़ों, रौजों और कर्बला में मजलिसों का आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने वाले अजादारों को तबर्रुक तकसीम किया जाता है। हुसैनाबाद एंड एलाइड ट्रस्ट की ओर से मोहर्रम में आसिफी इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, शाहनजफ, मकबरा सआदत अली खां सहित ट्रस्ट के अन्य इमामबाड़ों में पहली से 9 मोहर्रम तक मजलिसों का आयोजन किया जाता है। पहली मोहर्रम को शाही मोम की जरीह और सातवीं मोहर्रम को आसिफी इमामबाड़े से निकलने वाले मेहदी के जुलूस निकलता है। मजलिसों में शामिल होने वालों को प्रसाद के रूप में तबर्रुक बांटा जाता है। पहली और सातवीं मोहर्रम को निकलने वाले भव्य शाही जुलूसों में कई बैंड, ऊंट, और हाथी शामिल होते हैं। पहली मोहर्रम को निकलने वाले जुलूस की शान शाही मोम की जरीह विश्व प्रसिद्ध है, जिसे देखने और जियारत करने के लिए न सिर्फ देश बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। हुसैनाबाद ट्रस्ट के ओएसडी नासिर नकवी ने बताया कि जरी बन कर तैयार हो गई है। साथ ही कर्बलाओं व इमामबाड़ों में होने वाली मजलिसों की तैयारियां भी अंतिम चरण में है। लखनऊ में मोहर्रम का चांद 11 या 12 सितम्बर को देखा जाएगा। छोटे इमामबाड़े में तैयार हो रही जरीहपहली मोहर्रम को आसिफी इमामबाड़े से निकल कर हुसैनाबाद स्थित छोटे इमामबाड़े जाने वाली शाही जरीह की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। हुसैनाबाद स्थित छोटे इमामबाड़े में कारीगर जरीह को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। भारी-भरकम जरीह को तैयार करने में तीन महीने से अधिक का समय लगता है। जरीह में मोम, अबरक, रंगीन कागज, बांस, दफ्ती आदि का प्रयोग किया जाता है। अपनी खूबसूरती और भव्यता के लिए शाही जरी पूरी दुनिया में मशहूर है।

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  • Web Title:mohrram