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इस्लाम की सही तालीम पहुंचाती है बलंदी तक

पुराने लखनऊ में शुरू हुआ खमसा ए मजालिस का दौर

लखनऊ । कार्यालय संवाददाता

कर्बला के 72 शहीदों की याद में मेहदी घाट पीपे वाला पुल पर पांच दिवसीय मजलिसों का आयोजन किया गया है। खमसे की पहली मजलिस को मौलाना हसन जहीर ने मजलिस को खिताब किया। उन्होंने कहा कि जो लोग इस्लाम की सही तालीम हासिल करते हैं, वही समाज में बलंदी हासिल करते हैं। क्योंकि कुरान ने इंसान को ऐसी तालीम दी है जिससे समाज बेहतर बन सके। आज जो लोग कुरान की तालीम से दूर है वही लोग इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं। हजरत इमाम हुसैन कर्बला में इस्लाम बचाने गये थे जंग करने नहीं, लेकिन कर्बला में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों पर बहुत अत्याचारों किये गये।

रौजा-ए-काजमैन सआदतगंज में आयोजित पांच दिवसीय मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने ‘हक्के तस्लीम-ए-अहलेबैत क्या है शीर्षक से मजलिस को पढ़ा। मजलिस का आगाज तिलावते कुरान-ए-पाक से कारी नदीम नजफी ने किया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने कहा कि कुरान में बहुत सी आयते अजमते आले मोहम्मद की दलीलों के तौर पर मौजूद हैं। आले मोहम्मद दूरूद और सलवात का मरकज हैं। अल्लाह ने तमाम साहिबे इमान को, जो अल्लाह को एक मानता है, जो नबी को मानता है, जो कुरान को अल्लाह की किताब मानता है, जो मरने के बाद हिसाब-किताब पर यकीन रखता है और जो जन्नत-जहन्नुम पर इमान रखता है को हुक्म दिया है कि ऐ इमान वालों सलवात भेजो। यही आले मोहम्मद (अ़स़) ने कर्बला में दीने इस्लाम को बचाने के लिए अपना सब कुछ मिटा दिया। इमामबाड़ा गुलाम हुसैन बिलग्रामी पुराना तोपखाना बालागंज में पांच दिवासीय मजलिसों का आयोजन किया गया। मजलिसों को मौलाना फिरोज हुसैन ‘दीन में इख्तेलाफ क्यों है शीर्षक से खिताब करेंगे।

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