DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  लखनऊ  ›  मिशन 2019: यूपी में सांसद-विधायकों की तकरार भाजपा की राह का रोड़ा

लखनऊमिशन 2019: यूपी में सांसद-विधायकों की तकरार भाजपा की राह का रोड़ा

राज्य मुख्यालय | शोभित मिश्र,लखनऊPublished By: Deep
Tue, 02 Oct 2018 12:45 PM
मिशन 2019: यूपी में सांसद-विधायकों की तकरार भाजपा की राह का रोड़ा

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के सांसदों और विधायकों के बीच आपसी खींचतान लोकसभा चुनाव 2019 को फतह करने में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है। लोकसभा चुनाव संचालन समिति की बैठकों में प्रदेश संगठन के बड़े पदाधिकारी सांसदों और विधायकों की आपसी तकरार से परेशान हो रहे हैं। इन पदाधिकारियों की रिपोर्टों से प्रदेश नेतृत्व खासा चिंतित है। 
 

लड़ाई सड़क पर :

कई महीने पहले धौरहरा की सांसद और महोली के विधायक के बीच सरकारी कंबल बांटने को लेकर हुई लड़ाई सड़क पर आ गई थी। तकरार इतनी बढ़ी कि जब सांसद और विधायक आपस में तू-तू मैं-मैं कर रहे थे तो उसी समय उनके समर्थकों में मारपीट हो रही थी। मामले पर पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने गंभीर रूख अपना कर सांसद और विधायक को फटकार लगाई थी। 
 

विकास के काम अवरुद्ध :

बाराबंकी की सांसद और विधायकों के बीच छत्तीस का रिश्ता है। सांसद की व्यवहार और उनकी कार्यशैली से क्षेत्र के सभी पांच विधायक इस कदर नाराज हैं कि जिला स्तर पर हो रही विकास संबंधी बैठकों में सांसद जाती हैं तो विधायक नदारद रहते हैं। सांसद और विधायकों के बीच आपसी तालमेल के अभाव की वजह से बाराबंकी संसदीय क्षेत्र में विकास के काम रुके हुए हैं। 
 

इसी तरह भदोही के सांसद को लेकर भी वहां के विधायकों में खासी नाराज़गी है। उन सांसद पर आरोप हैं कि वे दिल्ली में ही रहते हैं। क्षेत्र में कभी-कभार आते हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि फैजाबाद के सांसद के खिलाफ रुदौली के विधायक ने मोर्चा खोल रखा है। जालौन के सांसद से भी वहां के विधायक असंतुष्ट हैं। विधायकों का आरोप है कि विकास के काम वे कराते हैं और लोकार्पण का पत्थर सांसद का लग जाता है। 

दो दर्जन सीटों पर सांसद और विधायकों के बीच तालमेल नहीं
प्रदेश के दो दर्जन संसदीय क्षेत्रों में पार्टी के सांसद और विधायक एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं। दोनों के अहम एक-दूसरे से टकरा रहे हैं। सांसदों व विधायकों की आपस में यह लड़ाई कार्यकर्ताओं तक नहीं जनता के बीच भी जगजाहिर हो रही है। एक उदाहरण, अलीगढ़ का है। वहां के एक कद्दावर नेता की सांसद से पटरी नहीं खा रही। इसके चलते संसदीय क्षेत्र में विकास के कामों पर तो असर पड़ ही रहा है, क्षेत्रीय जनता भी जनप्रतिनिधियों की कारगुजारियों से पार्टी के प्रति जनता में  अच्छा संदेश नहीं दे पा रही है। खुद भाजपा के बड़े प्रदेश पदाधिकारी का कहना है कि इसका असर लोकसभा चुनावों में पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है।  

संबंधित खबरें