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भारी घाटे में पहुंच गई पीसीएफ, कृषक सेवा केंद्र भी बदहाल

-वर्ष 2015-16 में हुआ 60 करोड़ का घाटा प्रमुख संवाददाता / राज्य मुख्यालय प्रादेशिक को-आपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) भारी घाटे में पहुंच गया है। यहां तक कि पीसीएफ की ओर से संचालित 481 किसान सेवा केंद्रों की हालत दयनीय हो गई है। यह केंद्र घाटे में चल रहे हैं। 48 किसान सेवा केंद्र तो विभागीय लापरवाही के कारण बंद ही हो गए। पीसीएफ की यह तस्वीर सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा की समीक्षा में सामने आई। शुक्रवार को पीसीएफ मुख्यालय सभागार में हुई इस बैठक में मंत्री ने पीसीएफ में बढ़ते घाटे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बताया गया कि वर्ष 2010-11 में यह संस्था 14.42 करोड़ रुपये के लाभ में थी लेकिन वर्ष 2015-16 में यह 60.50 करोड़ रुपये के घाटे में आ गई। मंत्री ने सवाल किया कि पीसीएफ एक व्यावसायिक संस्था है, इतना घाटा कैसे हुआ? उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में चल रहे किसान सेवा केन्द्र जिस तरह किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं, उसी प्रकार पीसीएफ के सेवा केन्द्रों को भी कार्य करना चाहिए। यह केन्द्र वर्ष भर किसानों के लिए काम करें। सहकारिता मंत्री ने बताया कि पीसीएफ द्वारा वर्ष 2017-18 में न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना के तहत 17.68 लाख मीट्रिक टन गेहूं का क्रय किया गया। इसमें 13 जिलों में लक्ष्य से 100 प्रतिशत या उससे अधिक तथा सात जिलों में लक्ष्य से 40 प्रतिशत से कम गेहूं खरीदा गया। चालू वर्ष में पीसीएफ के लिए 10 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा जिलावार लक्ष्य का निर्धारण इस तरह किया जाए कि उसकी प्राप्ति हो सके। पीसीएफ द्वारा कोयला वितरण की समीक्षा करते हुए सहकारिता मंत्री ने कहा कि इसकी सभी निविदाएं ई-टेण्डर के माध्यम से आमंत्रित की जाए। इस मौके पर पीसीएफ के प्रबंध निदेशक, कार्यकारी निदेशक तथा जिलों व मंडलों से आयए अधिकारी मौजूद रहे।

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  • Web Title:Minister angry with PCF loss PCF