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27 मार्च, 2020|3:27|IST

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किल्लत मॉस्क व पीपी किट के मनमाने दामों पर मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्यों ने सामान खरीदने से खड़े किए हाथ

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प्रमुख संवाददाता / राज्य मुख्यालयकोरोना वायरस में जरूरी चिकित्सीय सामानों के बाजार में मनमाने दामों से परेशान प्रदेश के मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्यों ने खुद इन सामानों को खरीदने से इनकार कर दिया है। बाजार में निर्धारित सरकारी दरों से काफी अधिक दामों पर ये सामान मिल रहे हैं। प्रधानाचार्यों ने इसकी सूचना चिकित्सा शिक्षा विभाग के आला-अफसरों को दे दी है। अब विभाग ने इन चिकित्सीय सामानों को खरीदने के लिए एक बार फिर से स्टेट मेडिकल कार्पोरेशन को जिम्मा दे दिया है। सरकारी मेडिकल कालेजों, चिकित्सा संस्थानों और विश्वविद्यालयों में कोरोना वायरस के संदिग्ध व संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ व अन्य चिकित्सा कर्मियों के लिए मॉस्क पर्सनल प्रोटेक्शन किट (पीपी किट) सैनेटाइजर व अन्य चिकित्सीय सामानों की किल्लत हो गई है। एचएलएल ने कर पा रहा है आपूर्तिइन सामानों की आपूर्ति का जिम्मा केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रम हिन्दुस्तान लैटेक्स लिमिटेड(एचएलएल) पर है। एचएलएल चिकित्सीय सामानों को निर्धारित सरकारी दरों पर बेचता है लेकिन मौजूदा समय में पूरे देश भर में फैले कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण एचएलएल के पास पूरे देश से मॉस्क,सैनेटाइजर व पीपी किट की मांग आ रही है। लेकिन प्रदेश के मेडिकल कालेजों व चिकित्सा संस्थानों के लिए की जा रही मांग को पूरी नहीं कर पा रही है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने पांच हजार पीपी किट और इतने ही मॉस्क की मांग एचएलएल से की है लेकिन वह अभी तक केवल एक ही हजार मॉस्क और इतनी ही पीपी किट दे पाया है। सरकार ने मेडिकल कालेजों को दिए 20 करोड़ मेडिकल कालेजों से लगातार आ रही मांग के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने दो दिन पहले एक आदेश जारी कर सभी मेडिकल कालेजों और संस्थानों को अपने स्तर पर ही अन्य निजी फर्मों व बाजार से मॉस्क, पीपी किट और सैनेटाइजर खरीदने के अधिकार दे दिए थे। विभाग ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य राहत आयुक्त द्वारा कोरोना वायरस से निपटने के लिए जिलों के डीएम को भेजी गई रकम से खुद वे जरूरी सामान खरीद सकते हैं। इसके लिए डीएम से समन्वय बनाएं। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने भी इन सामानों को खरीदने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए हैं। इनमें छह पुराने मेडिकल कालेजों को दो-दो करोड़ रुपये और बाकी अन्य को 50-50 लाख रुपये दिए गए हैं।बाजार में ड्योढ़े से दोगुने दामों में मॉस्क और पीपी किटइस आदेश के तहत मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्यों ने निजी फर्मों से मॉस्क व पीपी किट खरीदनी चाही तो पता लगा कि वे पीपी किट 900 रुपये की जगह 1500 रुपये में और 90 रुपये में आने वाला एन 95 मॉस्क 170 रुपये में बेच रहे हैं। इन चिकित्सीय सामानों के लिए निर्धारित सरकारी दरों से ज्यादा दाम पर सामान मिलने से मेडिकल कालेजों के प्रधानाचार्यों ने खुद सामान खरीदने में अपनी लाचारी जताई है। इन चिकित्सीय सामानों की प्रदेश में इतनी कमी है कि अभी गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डा. हर्षवर्धन के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग में प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने केन्द्र से मॉस्क और पीपी किट की मांग की थी।

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  • Web Title:Medical college principals raised their hands to buy goods at arbitrary prices of scarcity masks and PP kits