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जिले के 385 गांव हुए ओडीएफ फिर भी खुले में शौच जा रहे ग्रामीण

स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) करने के लिए अप्रैल माह में भी पांच हजार शौचालयों के निर्माण के लिए पैसा भेज दिया गया है। प्रत्येक सोमवार को खुद मुख्य सचिव प्रत्येक जनपदों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़कर शौचालयों की प्रगति के बारे में जान रहे हैं। 
जिला पंचायत राज विभाग का दावा है कि अब तक 385 गांव ओडीएफ हो चुके हैं। इसके तहत 38 हजार से अधिक शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। हालांकि ओडीएफ हो चुके गांवों में शौचालयों के प्रयोग की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
खुले में शौच से मुक्त करने के लिए इस समय जिले में शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक शौचालय के निर्माण पर 12 हजार रुपए का खर्च आ रहा है। अप्रैल माह में दो बार में पांच हजार शौचालयों के निर्माण के लिए भी धन भेज दिया गया है। इस बीच गांवों में ट्रिगरिंग का काम सुस्त पड़ गया है। प्रेरकों की ड्यूटी बिहार में स्वच्छाग्राहियों के सम्मेलन में लग गई थी। उन्हें प्रधानमंत्री ने सम्बोधित किया। लौट कर वे अब आ चुके हैं। 
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक वीरेन्द्र वर्मा ने बताया कि जल्द ही गांवों में ट्रिगरिंग के लिए प्लान तैयार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक जिले के 385 गांव ओडीएफ हो चुके हैं। शेष को करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। 
पूरे जिले को ओडीएफ करने के लिए बजट की कमी भी आड़े आ रही है। करोड़ों रुपए ओडीएफ करने के लिए खर्च हो चुके हैं। पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। इसके बाद भी जो प्रगति शौचालयों के प्रयोग को लेकर दिखनी चाहिए वह नहीं दिख रही है। 
जिला पंचायत राज अधिकारी मयाशंकर मिश्र का कहना है कि शौचालयों के प्रयोग के लिए सभी को प्रेरकों की तरफ से ट्रिगरिंग के माध्यम से प्रेरित किया जा रहा है। सीएलटीएस के तहत सामुदायिक कमेटियों का गठन किया गया है। लोगों को खुद से ही शौचालयों का प्रयोग कर इस महाअभियान को सफल बनाने की जरूरत है। 

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  • Web Title:many villages clean