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जालिम के खिलाफ मजलूम का साथ देना ही हुसैनियत

चार मोहर्रम को हबीब इब्ने मजाहिर की शहादत सुन कर रोए अजादार

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

रसूले खुदा दुनिया के लिए नेमत है। जब वह नर्म जमीन पर कदम रखते थे तो पैरों के निशान नहीं बनते थे। जब पथरीली जमीन पर कदम रखते थे तो निशाने कदम बनते चले जाते थे। दुनिया यह मोजिजा देख रही थी। उनके जिस्म से ऐसी खुश्बू निकलती थी की जो दुनिया में किसी ने सूंघी नहीं थी। लिहाजा किसी गली से गुजर जाते थे तो लोगों को अंदाजा हो जाता था की हजरत रसूले खुदा इधर से गुजरे हैं। चार मोहर्रम को इमामबाड़ा गुफरानमॉब में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना कल्बे जवाद ने रसूल के फजायल बयान किए।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि रसूल के चेहरे से ऐसा नूर निकलता था की जो सूई सूरज की रौशनी में उम्मुल मोमेनीन नहीं तलाश पाती थीं वह सूई रात को मिल जाती थी। मौलाना ने चार मोहर्रम को इमाम हुसैन के दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर के मसायब को बयान किया। इसे सुनकर अजादारों की आंखों से आंसू निकल आए। मौलाना ने कहा कि चार मोहर्रम से यजीदियों ने पानी पर पहरा लगा दिया था। 7 मोहर्रम को इमाम के हुसैन के खेमों में एक बूंद भी पानी नहीं था। छोटे-छोटे बच्चे भूख और प्यास से तड़प रहे थे लेकिन जालिमों को उन पर तरस नहीं आया।

जालिम का साथ देना गलत

इममाबाड़ा जन्नतमाब में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन को उस समय के सबसे शक्तिशाली बादशाह के विरूद्व आने की जरुरत क्यों पड़ी। इंसान अगर इस बात को समझ ले तो आज जो दुनिया में जो भी जुल्म हो रहे है। जो बेचैनी और खौफ का माहौल है वह खत्म हो जाएगा। इमाम हुसैन के सफर करने का मकसद यह था कि सत्य और असत्य को दुनिया के सामने लाया जाए। दुनिया को मालूम हो कि जो धर्म और मानवता पर अत्याचार करे, वह जालिम है। जिस पर अत्याचार हो रहे है वह मजलूम है।

आम करें कर्बला का पैगाम

इमामबाड़ा मलका जहां तहसीनगंज में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मोहम्मद मियां आब्दी ने कहा कि कर्बला ने जो हमें शिक्षा दी है। उस पैगाम को पूरी दुनिया में आम करना होगा। उन्होंने कहा कि कुरान व अहलेबैत एक दूसरे से जुदा नहीं हो सकते हैं। यदि कोई सिर्फ कुरान या अहलेबैत के नजदीक होना चाहे तो वह दोनों से ही दूर हो जाएगा। इसके अलावा इमामबाड़ा अफजल महल में मौलाना आगा रुही, नाजमियां मदरसे में मौलाना हमीदुल हसन व आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी ने मजलिस को खिताब किया। वहीं, हैदरगंज स्थित मुंशी फजले हुसैन में देर शाम इमाम हुसैन के भांजों की याद में ताबूत की जियारत कराई जाएगी।

आग पर मातम आज

कर्बला के शहीदों की याद में इमामबाड़ा शाहनजफ हजरतगज में कल रात 8 बजे मजलिस का आयोजन होगा। इसे मौलाना फरीदुल हसन खिताब करेंगे। इसके बाद अंजुमन मासूमिया असगरिया की ओर से आग पर मातम किया जाएगा। वहीं, कश्मीरी मोहल्ला स्थित मस्जिद आमली में रात 9 बजे आग पर मातम का आयोजन किया गया है।

आज पहनी जायेगी मन्नत

इमाम हुसैन के बेटे और चौथे इमाम इमाम जैनुल आब्दीन की याद में रविवार को अजादार मन्नत पहनेंगे। इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके बीमार बेटे हजरत इमाम जैनुल आबदीन को कैदी बनाकर कूफे व शाम के बाजारों में घुमाया गया था। इसी याद में अजादार अपने घरों के इमामबाड़ों में इनकी नज्र करके अपने बच्चों को हथकड़ी और बेढ़ी पहनाते है।

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