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रसूल की विलादत पर निकला जुलूस ए मदेहे सहाबा, हुई महफिलें

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता

रसूल ए खुदा की विलादत के मौके पर तंजीम ए मिल्लत की ओर से बड़े इमामबाड़े में जुलूस ए मदेहे सहाबा निकाला गया। अकीदतमंद जुलूस को बाहर निकाल कर हजरतगंज स्थित शाहनजफ इमामबाड़ा ले जाने की मांग कर रहे थे लेकिन प्रशासन ने जुलूस को गेट पर ही रोक दिया। इसके बाद जुलूस में शामिल लोग गिरफ्तारी करने की मांग करने लगे। वहीं, छोटे इमामबाड़े में गुरुवार रात जश्ने रहतम कमेटी की ओर से जश्ने रहमतुलआलेमीन का आयोजन किया गया। इससे पहले हुई महफिल को डॉ कल्बे सादिक ने खिताब किया। महफिल की शुरूआत कारी मोहम्मद अब्बास ने तिलावतें कुरान ए पाक से की।

जुलूस से पहले मिलाद व महफिल का आयोजन किया गया। इसमें मौलाना मीसम जैदी ने कहा कि हमें पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब और उनके सच्चे सहाबियों से मोहब्बत करनी चाहिए। मौलाना सदफ ने कहा कि अगर हुजूरे पाक से सच्ची मोहब्बत है तो अहलेबैत से भी मोहब्बत करना जरुरी है। इस मौके पर अंजुमने फिरोजिया, शमशीरे मुखतार और जानिसारे मुखतार ने नातिया कलाम पेश किये। इस मौके पर आफताब आलम, मुजफ्फर हुसैन, आसिफ हुसैन, मुबारक हुसैन, इन्तकाब रिजवी, हाशिम हुसैन, लडडन मिर्जा, फय्याज हैदर, हरीशचन्द्र धानुक ने अपने विचार प्रकट किये। शिया समुदाय ने रसूल अल्लाह व छठे इमाम जाफर-ए-सादिक के जन्म दिवस बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया। इस मौके पर लोगों ने घरों में नज्र व मिलाद का आयोजन किया। इमामबाडा हकीम मोहम्मद तकी में मौलाना मिर्जा मोहम्मद अश्फाक ने महफिल को खिताब किया।

कैसे बशर बयां करें अजमत रसूल की

रसूल की विलादत पर सबसे बड़ी महफिल जश्ने रहमतुलआलेमीन छोटे इमामबाड़े में हुई। इसमें शिया व सुन्नी समुदाय के उलमा ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। महफिल में जुहैर बाराबंकवी ने जब ‘ कैसे बशर बयां करें अजमत रसूल की, कुरान के लबों पर मिदहत रसूल की और ‘ऐसी किसी को दहर में इज्जत नहीं मिली, जैसी निगाहें हक में इज्जत रसूल की। इसे सुनकर लोगों ने नारे रिसालत के साथ उनका इस्तकबाल किया। इससे पहले हुई महफिल को सुन्नी उलमा जहांगीर आलम कासमी, रिटायर आईएएस अनीस अंसारी, मौलाना मीसम जैदी, मंसूर हसन खां समेत तमाम उलमा ने रसूल की शान में कलाम पेश किए।

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  • Web Title:mahfil
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