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9 अगस्त, 2020|4:48|IST

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वायु प्रदूषण से आगाह करने को झंडी वाले पार्क में कृत्रिम फेफड़े हुए स्थापित

- सौ प्रतिशत यू पी अभियान की पहल पर लखनऊ में अनूठा प्रयोग - जागरूकता कार्यक्रम का महापौर ने किया उद्घाटन- हेपा फिल्टर से दस दिन में जांचेंगे शहर की हवा की गुणवत्तालखनऊ। निज संवाददाताशहरवासियों को वायु प्रदूषण से आगाह करने का एक अनूठा प्रयोग किया गया। लालबाग स्थित झंडी वाले पार्क में मानव फेफड़े की भांति दिखाई देने वाले बड़े आकार के सफेद रंग के कृत्रिम फेफड़े स्थापित किए गए। उच्च क्षमता के हेपा फिल्टरों से युक्त फेफड़े दस दिन तक इंसानों की तरह पंखों की मदद से हवा खींचकर सांस लेंगे और इग्झास्ट की मदद से हवा बाहर छोड़ेंगे। सौ प्रतिशत यूपी अभियान की पहल पर क्लाइमेट एजेंडा की ओर से गुरुवार को लखनऊ में एक अनोखी पहल की गई। जिसका उद्घाटन महापौर संयुक्ता भाटिया, केजीएमयू के डॉ. सूर्यकांत व नगर आयुक्त डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने किया। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन कृत्रिम फेफड़ों पर वायु प्रदूषण के प्रभाव को देखकर समाज में जागरुकता फैलेगी। सौर ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली से ही शहर की हवा स्वच्छ की जा सकती है। उन्होंने आशा जताई कि इन कृत्रिम फेफड़ों पर पड़ने वाले असर को देखकर लोग शहर की हवा की शुद्ध बनाए रखने को प्रेरित होंगे। नगर आयुक्त डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने कहा कि आम लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। तभी वायु प्रदूषण को हराया जा सकेगा। नगर निगम की ओर से तमाम प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन शहर की आबोहवा को सांस लेने योग्य करने के लिए सभी को मिल कर प्रयास करना होगा। प्रदूषण के प्रभाव में आकर स्वत: काले हो जाएंगेसंस्था की सदस्य एकता शेखर ने बताया कि इन कृत्रिम फेफड़ों में अति उच्च क्षमता वाले हेपा फिल्टरों का उपयोग किया गया है। जो कि कृत्रिम फेफड़े वास्तविक फेफड़ों की तरह ही कार्य करते हैं। प्रदूषण के प्रभाव में आकर कुछ दिनों में इन फेफड़ों का सफेद रंग ग्रे कलर में और इसके बाद काले रंग का हो जाएगा। इसके माध्यम से यह समझाने का प्रयास है कि वायु प्रदूषण हमारे फेफड़ों और स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव डाल रहा है। बताया कि हाल में ही जारी रिपोर्ट के अनुसार उप्र में वर्ष 2017 में 2.60 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई है। जबकि देश में यह आंकड़ा 12 लाख से अधिक है। शुभ कार्यों व समारोह में 10 पौधे बांटेकेजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि प्रत्येक मनुष्य एक मिनट में 15 बार सांस लेता है। एक बार में आधा लीटर के करीब सांस लेता है। अगर आदमी की औसत आयु 65 वर्ष मान ली जाए तो एक मनुष्य अपने जीवन में 5 करोड़ रुपये कीमत की सांस पेड़-पौधों से मुफ्त में लेता है। इसलिए हर एक व्यक्ति को शुद्ध वायु के लिए हर शुभ कार्य व समारोह में कम से कम 10 पौधे बांटे। इससे न केवल लोगों को शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी और प्रदूषण भी कम करने में मदद मिलेगी।