मां के दुग्ध की तरह मातृभाषा का भी कोई विकल्प नहीं होता: प्रो. एसएन कपूर

Feb 28, 2026 07:42 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - लखनऊ विश्वविद्यालय में महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य-संस्कृति महोत्सव 2026 का समापन हुआ। इस अवसर पर संगोष्ठी में प्रसाद जी की रचनाओं पर चर्चा की गई। उच्च शिक्षा मंत्री ने प्रसाद की रचनाओं की सराहना की। संगोष्ठी में प्रसाद की कहानियों का वाचन भी हुआ। कार्यक्रम में कई विद्वानों और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

मां के दुग्ध की तरह मातृभाषा का भी कोई विकल्प नहीं होता: प्रो. एसएन कपूर

लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य-संस्कृति महोत्सव 2026 के समापन पर मालवीय सभागार में स्रष्टा-द्रष्टा जयशंकर प्रसाद का साहित्य : राष्ट्र-समाज-संस्कृति विषयक द्विदिवसीय संगोष्ठी सम्पन्न हुई। चित्रकला प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों को सम्मानित किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर कहा कि प्रसाद जी की रचनाएं राष्ट्र प्रेम और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई हैं। प्रसाद जी हिन्दी साहित्य के जीते-जागते तीर्थ थे। संगोष्ठी के जयशंकर प्रसाद का वैचारिक चिंतन विषयक चतुर्थ तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए एआईएच के पूर्व हेड प्रोफेसर शैलेन्द्र नाथ कपूर ने कहा कि माँ के दुग्ध की तरह मातृभाषा का भी कोई विकल्प नहीं होता।

साहित्य संस्कृति की प्रयोगशाला है। प्रसाद के ऐतिहासिक नाटकों के नायकों पर उन्होंने महत्वपूर्ण विचार रखे। ‘अजातशत्रु’ के माध्यम से प्रसाद बताते हैं कि जब गणतंत्रात्मक शासन होगा तो हमें किन चीजों से बचना होगा, रुकावटों से हम कैसे निपट सकते हैं, यह हम उनके नाटकों से सीख सकते हैं। बीएचयू से प्रो. आभा ठाकुर, एलयू से प्रोफेसर हरिशंकर मिश्र, प्रो. योगेन्द्र प्रताप सिंह ने भी विचार रखे। विशिष्ट अतिथि सुशील कुमार पाण्डेय ‘साहित्येन्दु’, हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. पवन अग्रवाल, जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी अवधेश कुमार गुप्त और डॉ. कविता प्रसाद समेत सैकड़ों लोगों की उपस्थिति रही। संचालन प्रो. अलका पांडेय तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हेमांशु सेन ने किया। कहानियों का वाचन हुआ सत्र की विशेष प्रस्तुति में प्रसाद जी की दो कहानियों का वाचन किया गया। ‘चूड़ी वाली’ कहानी का वाचन डॉ. नूतन वशिष्ठ, सोम गांगुली और पुनीता अवस्थी ने किया। दूसरी कहानी ‘छोटा जादूगर’ का वाचन हेमंत शुक्ला, अनवारुल हसन और पुनीता अवस्थी ने किया।

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