अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

लखनऊ विश्वविद्यालय: निर्माण कार्य में करोड़ों का घोटाला

लखनऊ विश्वविद्यालय में फैला भ्रष्टाचार परत दर परत उखड़ कर सामने आने लगा है। विश्वविद्यालय परिसर के रख-रखाव के नाम पर पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए।
लेकिन, इस बार की बारिश ने सारी कहानी खुलकर रख दी है। करोड़ों रुपये के ट्रीटमेंट के बाद भी छतों से पानी टपक रहा है। निर्माण में इतना घटिया सामान इस्तेमाल किया गया है कि कई भवनों की छतें गिरने के कगार पर पहुंच गई हैं। विश्वविद्यालय में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन प्रशासन को इसकी परवाह नहीं है। 
7 करोड़ रुपये सालाना है बजट
विश्वविद्यालय परिसर के रख-रखाव के लिए हर वर्ष करीब सात करोड़ रुपये का बजट किया जाता है। इसके बाद भी विश्वविद्यालय परिसर की हालत खस्ता है। शिक्षक और कर्मचारी लगातार इसको लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। लेकिन, भ्रष्टाचार का आलम यह है कि कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 

टैगोर लाइब्रेरी 
रीडिंग रूम की छत से टपकने लगा पानी 
टैगोर लाइब्रेरी के रीडिंग रूम की छत से पानी टपक रहा है। दो दिन पहले हुई बारिश में पानी हॉल में भर गया था। कर्मचारियों की मानें तो, हाल में ही इस छत की मरम्मत की गई थी। मरम्मत से पहले पानी नहीं आता था। लेकिन, मरम्मत के बाद पानी रिसने लगा है। 

कॉमर्स ब्लाक
कभी भी हो सकता है हादसा 
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने लखनऊ विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग में एक हॉल के लिए अनुदान दिया था।  शैक्षिक सत्र 2010-11 में जिमनेजियम के पास खाली पड़ी जमीन पर इसका निर्माण कराया गया। लाखों रुपये का टाइल्स लगाए गए। लेकिन, एक बार भी इस कमरा का इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। अब इस हॉल में लगातार पानी टपक रहा है। दो दिन पहले हुई बारिश में छज्जा गिर गया है। बीम लटकने लगी है।अभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

स्टाफ क्वार्टर
एक बारिश भी नहीं झेल पाईं छतें 
शिक्षकों के फैजाबाद रोड स्थिति आवासों में कुछ महीने पहले ही छतों की मरम्मत कराई गई है। ‘ब्रिक बैट कोबा’ ट्रीटमेंट के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए गए। लेकिन, इन सबके के बाद भी स्टाफ आवास एक बारिश नहीं झेल पाए हैं। शिक्षकों की मानें तो, जहां की  छत पहले ठीक थी वहां भी अब पानी टपकने लगा है।   

जिम्मेदार बोले 
विश्वविद्यालय की कई इमारतें 100 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। इसके रख रखाव में काफी खर्च आता है।  इस बार बारिश भी काफी ज्यादा हुुुुई है। जिसके चलते परेशानियों सामने आ रही हैं। सभी भवन और इमारतों में आ रही शिकायतों की गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके रख-रखाव के लिए  सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। 
प्रो. एनके पाण्डेय,  प्रवक्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Lucknow University: Crores of scams in construction work