Lok Sabha Elections 2019: Name and number of Ambedkar Nagar Lok Sabha seats changed many times - लोकसभा चुनाव 2019  : अंबेडकरनगर लोकसभा सीट का नाम और नंबर कई बार बदला DA Image

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लोकसभा चुनाव 2019  : अंबेडकरनगर लोकसभा सीट का नाम और नंबर कई बार बदला

Ambedkar Nagar Lok Sabha seat : अम्बेडकरनगर लोकसभा की सीट का इतिहास काफी दिलचस्प है। आजादी के पूर्व बिना नम्बर की लोकसभा का नाम फैजाबाद पूर्व था। इसके बाद नाम अकबरपुर हुआ। 1952 से 2004 तक संसदीय क्षेत्र के नम्बर में कई बार बदलाव है। 2004 तक 23 अकबरपुर नाम और नम्बर की संसदीय सीट अब 55 अम्बेडकरनगर के नम्बर और नाम की सीट है। इसके साथ अन्य कई रिकार्ड स्थानीय संसदीय सीट के नाम है। अम्बेडकरनगर लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा अकबरपुर, जलालपुर, टांडा, कटेहरी और गोशाईगंज शामिल है।

57 साल रहीं सुरक्षित सीट: स्थानीय संसदीय क्षेत्र की सीट ने सुरक्षित रहने का भी रिकार्ड बनाया है। 57 साल तक सीट सुरक्षित रहीं है। सीट साल 1952 से 2009 तक सुरक्षित थी। जनपद सृजन के 19 साल बाद लोकसभा की सीट का नाम जनपद के नाम अम्बेडकर नगर के नाम पर हुआ। इसी के साथ ही सीट भी सामान्य हो गई।

चार बार हुआ है परिसीमन: स्थानीय संसदीय क्षेत्र का चार बार परिसीमन होने का भी रिकार्ड है। 1952 में पहली बार और अंतिम बार 2009 में परिसीमन के बाद संसदीय क्षेत्र के स्वरूप और क्षेत्रफल के साथ नाम और नंबर में बदलाव हुआ था। वर्ष 1960 और 1975 में भी संसदीय सीट का परिसीमन हुआ था।  

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तीन को तीन-तीन बार बनाया सांसद
स्थानीय संसदीय क्षेत्र का एक और रिकार्ड है। सीट से तीन ऐसे लोग  हैं जो तीन-तीन बार सांसद चुने गए हैं। इसमें कांग्रेस से पन्नालाल, जनता पार्टी और लोकदल के राम अवध और बसपा की मायावती शामिल हैं। इनके अलावा अन्य किसी को स्थानीय संसदीय क्षेत्र की जनता ने दोबारा मौका नहीं दिया है। वीआईपी करते हैं उपेक्षा: स्थानीय संसदीय क्षेत्र की जनता वीआईपी  को सिर आंखों पर बिठाती है।  इसके विपरीत वीआईपी को क्षेत्र रास नहीं आता हैं। संसदीय क्षेत्र से मायावती तीन बार सांसद चुनी गई। तीनों बार उन्होंने इस्तीफा देकर यह साबित भी किया है। 

सबसे कम वोटों का रिजल्ट देने का रिकार्ड
स्थानीय संसदीय क्षेत्र के नाम एक और रिकार्ड है। शायद प्रदेश की एकमात्र संसदीय क्षेत्र है जिसका 1991 में महज 127 मत से परिणाम आया था। 

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