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Lok Sabha elections 2019 : मुस्लिम वोट बैंक के सहारे हैं कई दल, यूपी की इन सीटों पर रहेगी खास नजर

Lok Sabha elections 2019 : लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही यूपी की मुस्लिम बहुल सीटों को लेकर गुणा-गणित तेज हो गया है। इस लोकसभा चुनावों में मुस्लिम वोट किसकी झोली भरेंगे? यह बड़ा सवाल है। प्रदेश की डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुस्लिम बहुल सीटों पर बन रहा यह माहौल आगे कैसे और किस तरह से चुनावी समीकरणों पर असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। 

इन सीटों पर रहेगी खास नजर: मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, कैराना, अमरोहा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बरेली, मेरठ, सम्भल, बलरामपुर, मऊ, बदायूं, बहराइच, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बाराबंकी जैसी लोकसभा सीटों पर अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है। यूपी की मौजूदा विधानसभा में मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सर्वाधिक तीन विधायक मुस्लिम हैं। इसी तरह रामपुर, कानपुर, बहराइच व आजमगढ़ से दो-दो मुस्लिम विधायक हैं। जाहिर है यह मुस्लिम विधायक भी अपने क्षेत्र में मुस्लिम वोटों की गोलबंदी में जुटेंगे ही।  

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सपा ने कर दी शुरुआत: समाजवादी पार्टी ने अपने प्रमुख मुस्लिम विधायकों व पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर मुस्लिम वोट की बाबत रणनीति पर चिंतन करते हुए यूपी के इस बार के लोकसभा के चुनाव में मुस्लिम सियासत पर चर्चा को हवा दे दी है। मौजूदा विधानसभा में सबसे ज्यादा 19  मुस्लिम विधायक सपा के ही हैं। 

क्या रहेंगे मुस्लिम वोट की लामबंदी के मुद्दे: चुनाव के शुरुआती माहौल में एक बात तो साफ हो रही है कि मंदिर-मस्जिद, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान, गोकशी की आंशका में भीड़ द्वारा पिटाई-हत्या और तीन तलाक तो मुद्दे होंगे ही। इस बार मुसलमान शिक्षा, नौकरी, सत्ता में हिस्सेदारी के लिए ज्यादा फिक्रमंद हैं।
 सपा, बसपा यह बात अच्छी तरह समझ रही हैं कि ध्रुवीकरण से कभी किसी दौर के चुनावों में फायदे हुआ करते थे। मगर अब मुसलमान-मुसलमान की रट से बजाए नफे के नुकसान भी हो सकता है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव के नतीजे इसके गवाह हैं। यही वजह है कि इस बार भाजपा के खिलाफ मोर्चाबंदी करने वाली प्रमुख सियासी पार्टियों के चुनाव अभियान से मुसलमानों को लेकर वह जुमले और नारे अभी तक तो गायब ही हैं जो पहले कभी उनके मजबूत और धारदार हथियार हुआ करते थे।

तबस्सुम ने तोड़ा 16वीं लोकसभा में मुस्लिम नुमाइंदगी का सूखा

2014 में हुए मौजूदा 16 वीं लोकसभा के आम चुनाव में यूपी से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं जीत सका था। यह सूखा आखिरकार 31 मई 2018 को तब टूटा जब कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा समर्थित रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन भाजपा की मृगांका सिंह को 46000 वोटों से हराकर जीतीं। कैराना की यह लोकसभा सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता हुकुम सिंह के निधन की वजह से रिक्त हुई थी। 

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क्या सोचते हैं मुस्लिम युवा
जिस भारत के संविधान ने सुकून और हिफाजत के साथ इंसाफ के तकाजे पर हमें हंसी खुशी रहने और अपनी तरक्की करने की इजाजत दी। उसके सामाजिक ढांचे को बचाने की बेहद जरूरत है।  मैं सेक्यूलर पार्टी को ही वोट करूंगा।
 डा.अब्दुल्ला नासिर, असिस्टेंट प्रोफेसर लोहिया राष्ट्रीय विधि वि.वि.


मैंने तो इस बार नोटा का बटन दबाने की तैयारी कर रखी है। वैसे मेरे सभी बड़े मुझे और मेरे दोस्तों को यही बताते रहे हैं कि केन्द्र में मजबूत सरकार कांग्रेस ही दे सकती है। नोटा का बटन मैं इसलिए दबाउंगा क्यों कि मुझे कोई भी सियासी पार्टी समझ में ही नहीं आ रही है।
कम्बर हुसैन-लॉ फाइनल इयर

अखिलेश सही हैं, मायावती भी सही हैं मगर मुझे राहुल गांधी बहुत अच्छे लगते हैं क्योंकि वह बिल्कुल सिम्पल हैं। मैं पहली बार इस इलेक्शन में वोट दूंगी। मगर मैं वोट किसे दूंगी अभी यह तय नहीं है, परिवार में जो तय होगा वही करूंगी। 
कशिश मिर्जा 12वीं की छात्रा-रुस्तम नगर

-मैं कोई हिन्दू या मुसलमान के तौर पर नहीं सोचती। मगर जो कुछ हो रहा है उस पर मेरे जेहन में बार-बार यह सवाल आता है कि आखिर इलेक्शन से ठीक पहले पुलवामा अटैक क्यों हुआ? मैं किसी पर इल्जाम नहीं लगा रही, मगर यह बात सोचने की तो है ही।
 परवीन फातिमा ग्रेज्यूएट

-यूपी का मुसलमान नौकरी, शिक्षा और हुकूमत में हिस्सेदारी तय करने के लिए ही वोट देगा। हम भाजपा हराओ के नारे के बिल्कुल खिलाफ हैं, यह बात अलग है कि भाजपा मुसलमानों की हितैषी पार्टी नहीं कही जा सकती। मगर हम मुसलमानों को ध्रुवीकरण से हटाकर उनके बुनियादी मुद्दों पर लामबंद करने के लिए चुनाव में उतर रहे हैं।
-मौलाना आमिर रशादी, अध्यक्ष राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल

यूपी में मुस्लिम बहुल जिले

जिला    मुस्लिम आबादी %
मुरादाबाद    50.80
रामपुर        50.57
बिजनौर      43.04
सहारनपुर    41.95
शामली         41.77
मुजफ्फरनगर    41.10
अमरोहा        40.78
बलरामपुर     37.51
बरेली             34.53
मेरठ              34.43
बहराइच         33.54
सम्भल          32.88
हापुड             32.39
श्रावस्ती         30.79
सिद्धार्थनगर    29.23
बदायूं             23.26
बाराबंकी          22.61
गाजियाबाद    22.53
लखनऊ           21.46
खीरी              20.08
अलीगढ़           19.85
गोण्डा             19.76
मऊ                 19.43

किस पार्टी के कितने मुस्लिम विधायक
सपा    19
बसपा    04
कांग्रेस    02
कुल    25 

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  • Web Title:Lok Sabha Elections 2019: Many parties supported by Muslim vote bank will be in the seats of UP