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स्वदेश लौटे अवधी विद्वानों व कलाकारों का एसआर कॉलेज में अभिनन्दन

संगोष्ठी

-अवधी विद्वानों का एसआर कॉलेज में हुआ अभिनन्दन

-'नेपाल में अवधी साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत विषय पर चर्चा

नेपाल ऐसा पहला देश है जिसने माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा में अवधी को माध्यम भाषा बनाया है। नेपाल में अवधी भाषा के मानकीकरण पर भी कार्य जारी है। अवधी भाषा नेपाल और भारत के सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक सेतु का काम कर रही है। एसआर इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी परिसर में वरिष्ठ समाज सेवी पवन सिंह चौहान ने यह बात कही। वे 'नेपाल में अवधी साहित्य एवं सांस्कृतिक विरासत विषयक संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

उन्होंने 11 से 13 मई तक नेपाल के लुम्बिनी व काठमांडू में सम्पन्न अन्तर्राष्ट्रीय अवधी सम्मेलन से लौटे भारतीय दल का अभिनन्दन भी किया। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित भी मौजूद रहे। अवध भारती संस्थान के अध्यक्ष डॉ. रामबहादुर मिसिर ने बताया कि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भविष्य में एक अन्तर्राष्ट्रीय अवधी सम्मेलन का आयोजन लखनऊ में किया जाएगा। अवधी लेखक नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान, सम्मेलन के जनसम्पर्क अधिकारी एसके गोपाल ने नेपाल के काठमाण्डू स्थित बेगम हजरत महल की मजार के सौन्दर्यीकरण के लिए भारत सरकार की ओर से नेपाल से आग्रह करने की मांग उठायी। लोक गायिका कुसुम वर्मा ने लोकगीत और आर्ट एण्ड मैजिक फाउण्डेशन के अध्यक्ष जादूगर सुरेश कुमार ने जादू द्वारा सादे कागज को जलाकर नेपाली नोट बनाने का करतब दिखाया। संगोष्ठी में डा. राकेश पाण्डेय, रमाकान्त तिवारी ‘रामिल, डा. अमिता दुबे, डा. विनय दास, इकबाल बहादुर राही, प्रदीप सारंग आदि का अभिनन्दन किया गया।

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