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16 हजार गायों के संरक्षण की व्यवस्था हुई

लखनऊ प्रमुख संवाददाता

निराश्रित गौवंश के संरक्षण की दिक्कत अब दूर होगी। लखनऊ समेत मंडल के अन्य जिलों में गौ संरक्षण के लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्था की गई है। कमिश्नर के निर्देश पर फिलवक्त 16 हजार 500 मवेशियों को संरक्षण देने का इंतजाम है। सोमवार को इस संबंध में पशु आश्रय स्थलों के निर्माण और संचालन के लिए कमिश्नर अनिल गर्ग की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि जितनी तेजी से इस दिशा में कार्य हो रहा है, किसानों को पशुओं के आंतक से जल्द ही मुक्ति मिलेगी। बैठक में नगर आयुक्त लखनऊ इन्द्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि नगर निगम ने तीन गौशालाओं को विकसित किया है। इनमें नादरगंज स्थित कान्हा उपवन में 8500 पशुओं के संरक्षण की क्षमता है। मौजूदा समय यहां 8300 पशु हैं। इसी प्रकार जानकीपुरम स्थित लक्ष्मण गौशाला की क्षमता 800 की है जहां 750 पशु हैं। नए विकसित किए गए राधा उपवन में 500 पशुओं की क्षमता का अश्राय स्थल बनाया गया है। इसके अलावा हरदोई में दो अस्थायी पशु अश्रय स्थल विकसित किए गए हैं। यहां 12-12 हजार वर्गफुट के टीन शेड बनाए गए हैं। पानी के लिए सबमर्सेबल पम्प और रोशनी की व्यवस्था सौर ऊर्जा से की गई है। जन सहयोग से मवेशियों के चारे का इंतजाम किया जा रहा है। कमिश्नर ने इस पर हरदोई के अधिकारियों की प्रशंस की। बैठक में अपर आयुक्त प्रशासन रणविजय यादव, संयुक्त विकास आयुक्त आरसी पाण्डेय, नगर आयुक्त इन्द्रमणि त्रिपाठी मौजूद रहे।

लखनऊ में 51 से अधिक गौशालाएं

किसानों के खेत बचे रहें। गाय भी सुरक्षित रहें और उनकी देखरेख हो। इसके लिए जिले में बड़े स्तर पर गौशालाएं बनाने का काम शुरू हो गया है। फिलहाल 51 से अधिक गौशालाएं बन रही हैं। इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर और बनाई जाएंगी। जिले के आठ ब्लॉकों के अलावा आठ नगर पंचायतों में भी गौशाला बनाने का काम शुरू हो गया है। नगर पंचायतों में गौशाला बनाए जाने की जिम्मेदारी एडीएम ट्रांस गोमती अनिल कुमार को दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक गौशाला की क्षमता 200 की होगी। वहीं, ग्राम पंचायत स्तर पर 31 गौशालाएं बनाने का प्रस्ताव आ चुका है। यह भी जल्द तैयार हो जाएंगी। इसके बाद कुछ अन्य प्रस्ताव भी आने की उम्मीद है। वहीं, नगर निगम फिलहाल 10 हजार गायों की देखरेख कर रहा है। इसके अलावा जिले में एक गौ सरंक्षण केन्द्र भी बनाया जा रहा है।

बधियाकरण से संख्या पर अंकुश लगेगा

बैठक में पशु पालन विभाग को निर्देश दिया गया कि निरश्रित गोवंश में 80 फीसदी बछड़े या सांड़ हैं। इनकी हिंसक प्रवृत्ति को देखते हुए बधियाकरण अभियान चलाया जाए। नर गोवंश का बधियाकरण करने के लिए ट्रंकुलाइजर गन की व्यवस्था करने के लिए कमिश्नर ने शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने का अपर निदेशक पशुपालन को निर्देश दिया। इसके अलावा जेलों की अतिरिक्त भूमि पर भी स्थायी निराश्रित गौवंश संरक्षण केन्द्र बनाने के भी निर्देश दिए।

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