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प्रदूषण पर लगाम के दावे हवा हो गए देखते-देखते

पिछले साल 16 नवम्बर को प्रदूषण नियंत्रण के लिए लिया था संकल्पअब भी शहर में दौड़ रहे डीजल टेम्पो, नहीं हो रही वाहनों की प्रदूषण जांचलखनऊ प्रमुख संवाददाताप्रदूषण नियंत्रित करने के लिए पिछले साल नवम्बर माह में ही मजबूत योजनाएं तैयार की गई थीं। सभी विभागों के अफसरों को डीएम ने तलब किया था। उनको लक्ष्य दिया गया था। साल गया, बात गई। अब कर्मचारी दबी जुबान में कह रहे हैं कि पिछले साल बनीं योजनाएं देखते-देखते हवा हो गईं।डीजल टेम्पो अब भी काला धुआं उगलते हुए शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बिना प्रदूषण जांच कराए चल रहे वाहनों पर कार्रवाई होती कहीं नहीं दिख रही है। सहालग में खूब डीजल जनरेटरों का प्रयोग हो रहा है। पिछले वर्ष 16 दिसम्बर को कलेक्ट्रेट के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में डीएम कौशल राज शर्मा ने जिला स्तर के विभागों के मुखिया को प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी थी। परिवहन विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी कि शहर में अवैध रूप से चल रहे ढाई हजार टेम्पो बाहर किए जाएं। इसके लिए क्षेत्रीय अपर सिटी मजिस्ट्रेटों को भी कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया था कि सरकारी वाहनों के प्रदूषण की नियमित जांच कराएं। इसके अलावा प्रदूषण की जांच करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली जांचने का भी निर्देश दिया था। सभी थानेदारों को कालाधुआं उगलने वाले डीजल जनसेट का प्रयोग न करने देने का निर्देश दिया गया था।

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