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टीले पर बसे लोगों के परिवार में हो रही मौतों से डरे ग्रामीण

रहीमाबाद। हिन्दुस्तान संवाद रहीमाबाद के तरौना गांव में एक टीले पर पिछले आठ वर्ष से लगभग एक दर्जन लोगों ने मकान बना रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से इस टीले पर मकान बनाया है तब से प्रत्येक परिवार में लगातार मौतें हो रही हैं । पिछले 7 सालों में इन एक दर्जन घरों में 16 मौतें हो चुकी हैं । जिससे ग्रामीण डरे हुए हैं। ग्रामीण कई तांत्रिकों को भी बुला चुके हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो बगैर किसी बीमारी के ही अचानक मौतें हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह टीला खाली पड़ा हुआ था । धीरे-धीरे लोगों ने इस पर मकान बनाना शुरू किए मकान बनाकर जब रहने लगे तो ताबड़तोड़ मोतें होने लगी। रहीमाबाद के तरौना गांव में हरदोई रोड के किनारे एक टीला है । गांव के लोगों ने इस टीले पर धीरे-धीरे मकान बनाना शुरू किया । ग्रामीणों का कहना है कि सबसे पहले गांव के प्रसादी ने टीले की खुदाई शुरू की थी। कि इस किले के नीचे सोना चांदी और जेवर मिलेगा खुदाई के कुछ दिन बाद ही प्रसादी 40 साल की मौत हो गई । इसके बाद प्रसादी के परिवार में उनके पिता खगेश्वर 60 साल की मौत हो गई । बड़े बेटे बड़क्के 25 साल आदित्य 20 साल की मौत पेट में अचानक दर्द होने से हो गई और बेटी प्रियांशी ने बेता नाले में कूदकर जान दे दी। सैकड़ों साल से खाली पड़ा था टीला गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि सैकड़ों सालों से यह टीला खाली पड़ा हुआ था । शादी विवाह के समय लोग इस टीले पर दूल्हा और दुल्हन को लेकर एक चक्कर लगाने आते थे। धीरे-धीरे लोगों ने इस पर कब्जा करना शुरू किया और अपने मकान बनाने लगे। 7 साल में हुई 16 मौतें ग्रामीणों के मुताबिक पिछले 7 साल में यहां पर एक दर्जन से अधिक घर बने रामस्वरूप के बेटे करन 19 साल ने फांसी लगा ली और बेटी गुड़िया 12 साल बिजली के करंट से चिपक कर मर गई । इसी प्रकार अरविंद 10 साल कि सांप के काटने से मौत हो गई राहुल 3 साल की अचानक पेट में दर्द से मौत हो गई। रोली 15 साल ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। शालिनी की भी अचानक मौत हो गई । महावीर 50 साल टेकचंद 20 साल गफूर 7 साल उमाशंकर 40 साल शरीफ 15 साल परसादी 40 साल खगेश्वर 7 साल बडक्के 25 साल आदित्य 20 साल प्रियांशी 16 साल की मौतों से परिवार के लोग दहशत में आ गए। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पूर्व गांव के भीतर वह लोग रहा करते थे पुराने मकान में उनका परिवार खुशहाल था। जब से इस टीले पर मकान बनाया है पूरा परिवार अक्सर बीमार रहता है और अचानक हर घर में मौतें हो रही हैं। ग्रामीणों ने बुलाए तांत्रिक ग्रामीणों ने अचानक हो रही मौतों से परेशान होकर कई बार तांत्रिकों को भी बुलाया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका । मौतों का सिलसिला बदस्तूर जारी है । तांत्रिक ने ग्रामीणों से कहा कि अच्छाई चाहते हो तो यह टीला खाली कर दो लेकिन गांव के लोग फिर भी नहीं माने। खुशहाली को तरसते ग्रामीण इस टीले पर बसे लगभग एक दर्जन मकान में लगभग सौ लोग रहते हैं । लेकिन किसी परिवार में कोई भी खुशहाली नहीं है। हर चार-पांच महीने पर एक मौत हो जाने से पूरा मोहल्ला गमगीन हो जाता है । और चर्चाओं का दौर फिर शुरू हो जाता है।

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