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पूरा शहर धूम-धाम से मनायेगा मनौतियों के राजा का जन्मोत्सव

प्रथम देव भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव की तैयारी राजधानी में पूरी कर ली गई हैं। पूरे शहर में जगह-जगह उत्सव को धूमधाम से मनाने के लिये भक्तों का उत्साह दखेते ही बन रहा है। मुख्य आयोजन हनुमान सेतु स्थित झूलेलाल वाटिका में होगा जहां इस पर्व को महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। यहां गजानन की सबसे बड़ी प्रतिमा करीब आठ फीट ऊंची स्थापित की गई है। गणपति बप्पा मोर्या के जयकारों और पूरे विधि-विधान से भगवान श्रीगणेश की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की के साथ ही आयोजन का शुभारंभ गुरुवार से होगा। इसके अलावा राजधानी के अलीगंज, आलमबाग, अमीनाबाद, गोमतीनगर समेत शहर के विभिन्न मोहल्लों और कालोनियों में बप्पा की स्थापना घर-घर की जाएगी। विभिन्न स्थलों पर पंडालों में बप्पा विराजेंग और भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से उनका जन्मोत्सव सप्ताह भर मनायेंगे।

1. झूलेलाल वाटिका में ‘रामेश्वरम मन्दिर में विराजेंगे प्रथम देव

झूलेलाल वाटिका में मनौतियों के राजा के नाम से होने वाला सबसे बड़े श्री गणेश प्राकट्य महोत्सव के लिए विशाल पण्डाल कोलकाता के कारीगरों ने तैयार किया है। पण्डाल के बाहर महोत्सव का रुप दिया जा रहा है। स्थल पर आने वालों के लिए पार्किंग की विशेष सुविधा दी जायेगी। संरक्षक भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गणेश पूजा पण्डाल अलग थीम ‘रामेश्वरम मन्दिर पर तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार भी गणेश प्रतिमा का भू विसर्जन होगा। जिससे लोगों में यह सन्देश जाये कि नदियों को प्रदूषित नही करना है। 16 हजार वर्गफुट में होने वाले उत्सव में बप्पा का 80 फुट ऊंचा वाटरफ्रुफ पण्डाल तैयार हो रहा है।

राजधानी की सबसे बड़ी प्रतिमा की स्थाप्ना होगी

यहां गजानन की सबसे बड़ी प्रतिमा करीब आठ फीट ऊंची स्थापित की गई है जिसे राजधानी के मूर्तिकार श्रवण प्रजापति की देखरेख में कारीगरों ने तैयार किया है। मूर्ति को सिद्ध विनायक का रुप दिया गया है।

परिसर में चाट, फास्ट-फ्रूड एवं आइस्क्रीम की दुकाने होंगी

10-10 वर्गफुट की करीब सौ दुकाने सज रही है जिन पर बड़े बूढे, बच्चों एवं महिलाओं के लिये चाट, फास्ट-फ्रूड एवं आइस्क्रीम की दुकाने व उनके पसन्द की सामग्री भी मिलेगी।

पंडाल के बाहर बनाया गया हान्टेड हाउस

इस बार लोगो के लिए हान्टेड हाउस बनवाया जा रहा है। इसमें डायनासोर जैसे अन्य जानवर के माडल रहेंगे। जिसे कारीगर लाईट और साउण्ड के माध्यम से सजीव एहसास करायेंगे।

प्रसाद के स्टॉल लगेंगे

संरक्षक देशराज अग्रवाल ने बताया इस बार कमेटी की ओर से एक प्रसाद का स्टाल लगेगा जिस पर भगवान गजानन को चढ़ाने के लिए मोदक कम पैसे में भक्तों को प्राप्त हो सकेगा।

पंडाल का बीमा10 करोड़ रुपये

पण्डाल का बीमा पहले की तरह इस बार भी 10 करोड़ का कराया गया है। जिसमें गजानन की ज्वेलरी, पण्डाल का तथा सामान्य बीमा है।

विशेष सुरक्षा में रहेंगे गणपति

कीमती सोने, चांदी के जेवरों से सजे गणपति को विशेष सुरक्षा घेरे में रखा जायेगा। पण्डाल के चारो तरफ नौ फुट ऊंची बेरीकेटिंग की जायेगी तथा 50 सीसी टीवी कैमरे और लगभग 80 सुरक्षाकर्मियों के पहरे में लगाया जायेगा।

लेजर लाईटों का आकर्षण देखते ही बनेंगा

संरक्षक घनश्याम अग्रवाल ‘गुड्डा ने बताया कि झूलेलाल वाटिका गोमती तट पर होने वाले पहले गणेशोत्सव में इस बार लेजर लाईट एवं एलईडी लाईटें आकर्षण का केन्द्र रहेंगी। कोलकाता से आये कारीगर पिछेले एक माह सजाने में लगे हैं। लाइटें भी नई डिजाइन की आयी है जो जलते ही लोगों को आकर्षित करेंगी।

23 को शोभा यात्रा

23 सितम्बर को शोभा यात्रा झूलेलाल वाटिका से प्रारम्भ होकर विश्वविद्यालय मार्ग, आईटी चैराहा, रामकृष्ण मठ, शंकरनगर, नजीरगंज,डालीगंज होते हुये झूलेलाल वाटिका पर समाप्त होगी। विसर्जन शोभा यात्रा निकलने के बाद गणेश प्रतिमा का झूलेलाल वाटिका के पास भू विसर्जन किया जायेगा।

क्या होगा आरती और दर्शन का समय

मनौतियों के राजा शृंगार एवं आरती प्रतिदिन प्रातः 10 बजे एवं सायं 6:00 बजे होगी। इसमें सभी श्रद्धालु भाग ले सकते हैं । इसके अलावा प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे से प्रातः 9:30 बजे तक, उसके बाद प्रातः10:00 बजे से अपरान्ह 5:00 बजे तक एवं सायं 6:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक मनौतियों के राजा के दर्शन होंगे।

उत्सव के मुख्य आकर्षण

14 सितम्बर को गजरा, रात्रि 8 बजे,

16 सितम्बर पाशांकुश पूजन माध्यान्ह 12 बजे

18 सितम्बर छप्पन भोग, रात्रि 8 बजे

19 सितम्बर दूर्वाभिषेक, मध्यान्ह 12 बजे,

21 सितम्बर सिन्दूराभिषेक मध्याह्न 12 बजे,

22 सितम्बर महाभिषेक मध्यान्ह 12 बजे,

महामोदक रात्रि 8 बजे।

हमारे आयोजन के माध्यम से हम गोमती सफाई का संदेश शहर की जनता को देंगे। साथ ही लोगों से अपील करेंगे कि गोमती नदी को पूरी तरह से साफ और स्वच्छ बनाने में सहयोग प्रदान करें।

भारत भूषण गुप्ता, संयोजक

झूलेलाल वाटिका आयोजन

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2. नांव पर सवार होकर आएंगे अलीगंज के राजा

अलीगंज के राजा भगवान गणेश इस बार नांव पर सवार होकर आयेंगे और सबका बेड़ा पार करेंगे। गुलाब वाटिका गणेश पूजा समिति की ओर से भगवान गणेश के जन्मोत्सव के अवसर पर पांच दिवसीय गणेश महोत्सव की शुरुआत 13 सितम्बर को सुबह सात बजे मूर्ति स्थापना के साथ गुलाब वाटिका अपार्टमेंट परिसर में होगी। इस बार खास यह है कि पण्डाल में बप्पा का दरबार थर्माकोल के सहयोग से मोर के रुप में नाव का आकार दिया गया। नाव के आस पास समुद्र बनाया गया है और उसी समुद्र से भगवान गणेश नाव पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद देंगे और सबका बेड़ा पार करेंगे। पण्डाल कोलकाता के कारीगरों द्वारा पिछले कई दिनों से तैयार हो रहा है। समिति के महेश कुमार अग्रवाल, सन्दीप अग्रवाल ने बताया कि पांच दिवसीय आयोजन में विभिन्न प्रकार के सामाजिक नाटक व अन्य धार्मिक आयोजन होंगे। मीडिया प्रभारी मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि इस बार देश के विभिन्न क्षेत्रा में आई भीषण बाढ़ को देखते हुये अलीगंज के बप्पा नाव पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देंगे। उत्सव का समापन 17 सितम्बर को विसर्जन शोभा यात्रा के साथ होगा

छह वर्ष पूर्व डॉ. सन्दीप अग्रवाल ने बप्पा का उत्सव कराने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे लोगों का भरपूर सहयोग मिलता गया और आज यह बड़े स्वरुप में होने लगा है।

डॉ. संदीप अग्रवाल, अलीगंज

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3. गोमतीनगर के राजा पॉलीथीन के विरोध का देंगे सन्देश

गणेश पूजा समिति की ओर से पत्रकारपुरम चौराहा गोमतीनगर में होने वाले गणेशोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। समिति के सरंक्षक राम सागर यादव ने बताया की हर वर्ष की भांति इस बार पंडाल कोलकाता से आए कारीगरों के द्वारा विगत 15 दिनो से तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि गोमतीनगर के राजा इस बार ‘नो प्लास्टिक का सन्देश देंगे। 10 दिन तक चलने वाले कार्यक्रम में रोज़ाना मशहूर पार्टियों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 13 को मूर्ति की स्थापना सुबह 10 बजे की जाएगी। शाम को मां वैष्णो जागरण पार्टी की ओर से भजन संध्या होगी।

विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन होंगे

14 को श्री श्याम जी द्वारा माता की चौकी, 15 को सुंदरकांड व भव्य झांकी, 16 को साई बाबा पालकी,17 को नवेद ग्रूप का भस्म आरती 18 को झांकी 19 को डांडिया नाइट, 20 को गायत्री दीपदान व सुजीत अलबेला ग्रूप द्वारा भव्य झांकी 21 को नितिन आर्ट ग्रूप दिल्ली का कार्यक्रम, 22 को मथुरा के कलाकारों द्वारा कृष्ण लीला व शनि तेलदान का कार्यक्रम होगा। 23 को विशाल भंडारे का आयोजन व विसर्जन होगा। तैयारियों को लेकर समिति मनीष गुप्ता, राजीव जयसवाल, प्रतिभा झा, संजय शुक्ला, अमित निगम, राजीव त्रिपाठी, धनंजय सिंह, विनय यादव, सर्वेश यादव लगे हुये है।

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गजानन के नाम चिठ्ठी लिख सकेंगे भक्त

श्री गणेश प्राकट्य महोत्सव के संरक्षक भारत भूषण गुप्ता ने बताया कि हर साल करीब एक लाख चिट्ठियां लिखी जाने वाले बप्पा के दरबार में करीब पांच लाख भक्तों के आने की उम्मीद है। गुलाब वाटिका गणेश पूजा समिति की ओर से भगवान गणेश के जन्मोत्सव के अवसर पर पांच दिवसीय गणेश महोत्सव में भक्तों के लिये विशेष व्यवस्था की गई है। भक्त यहां प्रतिदिन गजानन के नाम चिठ्ठी दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे तक भक्त लिख सकते है।

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4. मराठी समाज के आयोजन में गहनों से लदे हुए गणेश जी के होंगे दर्शन

राजधानी में पिछले 12 साल से मराठी समाज के लोग गणेश उत्सव का आयोजन कर रहे हैं। श्री गणपति उत्सव मण्डल चौक कल्ली जी राम मंदिर चौक सर्राफा के उमेश पाटील ने बताया कि 101 दियों की रोशनी में पूजन किया जाएगा। मराठी समाज की ओर से होने वाले इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल राम नाईक और बिहार के राज्यपाल लालजी टण्डन मौजूद रहेंगे। यहां के गणेश जी की मूर्ति महाराष्ट्र से मंगवाई गई है। सर्राफा बाजार में होने वाले इस आयोजन में मूर्ति गहनों से लदी हुई नजर आयेगी। 13 से 19 सितम्बर तक होने वाले आयोजन में 13 को मूर्ति स्थापना और सुंदरकाण्ड, 14 को जया शुक्ला जागरण पार्टी, 15 को सौरभ सरकार का मैजिक शो, 16 को शुक्ला जागरण पार्टी, 17 सितम्बर को भजन संध्या, 18 को महाप्रसाद, 19 सितम्बर को मूर्ति विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी।

1986 में पहली बार चौक चौराहे पर गणेश उत्सव की शुरुआत की गई थी। इसके बाद लोहिया पार्क की तरफ स्थान बदला और फिर पिछले 12 साल से चौक कल्ली जी राम मंदिर चौक सर्राफा मार्केट में हो रहा है।

उमेश कुमार पाटिल

संयोजक, अध्यक्ष मराठी समाज उत्तर प्रदेश

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बाल गंगाधर तिलक के प्रयास से 'गणेश' राष्ट्रीय एकता के प्रतीक बने

मराठी समाज के प्रदेश अध्यक्ष उमेश पाटील बताते हैं कि पेशवाओं ने गणेशोत्सव को बढ़ावा दिया। पुणे में कस्बा गणपति नाम से प्रसिद्ध गणपति की स्थपना शिवाजी महाराज की मां जीजाबाई ने की थी। परंतु लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणोत्सव को को जो स्वरूप दिया उससे गणेश राष्ट्रीय एकता के प्रतीक बन गये। पहले गणेश पूजा परिवार तक ही सीमित थी। तिलक ने पूजा को सार्वजनिक महोत्सव का रूप देते समय उसे केवल धार्मिक कर्मकांड तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि आजादी की लड़ाई, छुआछूत दूर करने और समाज को संगठित करने तथा आम आदमी का ज्ञानवर्धन करने का उसे जरिया बनाया और उसे एक आंदोलन का स्वरूप दिया। इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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इतिहास: 1893 से गणेशोत्सव पर्व ने लिया था विराट रूप

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में गणेशोत्सव का जो सार्वजनिक पौधरोपण किया था वह अब विराट वट वृक्ष का रूप ले चुका है। 1893 में जब बाल गंगाधर जी ने सार्वजानिक गणेश पूजन का आयोजन किया तो उनका मकसद सभी जातियो धर्मो को एक साझा मंच देने का था जहा सब बैठ कर मिल कर कोई विचार कर सकें। तब पहली बार पेशवाओ के पूज्य देव गणेश को बाहर लाया गया था। केवल महाराष्ट्र में ही 50 हजार से ज्यादा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में काफी संख्या में गणेशोत्सव मंडल है।

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मंगलमूर्ति हमें क्या सीख देते हैं, उनके हर अंग में छुपा है संदेश

सभी देवों में प्रथम पूज्य: गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणेश का जन्म भाद्रमास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसलिए हर साल भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य प्रशांत तिवारी बताते हैं कि गणेश को वेदों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव के समान आदि देव के रूप में वर्णित किया गया है। इनकी पूजा त्रिदेव भी करते हैं। भगवान श्री गणेश सभी देवों में प्रथम पूज्य हैं। भगवान श्री गणेश मंगलमूर्ति भी कहे जाते हैं क्योंकि इनके सभी अंग जीवन को सही दिशा देने की सीख देते हैं।

बड़ा मस्तक: बड़े सिर वाले व्यक्ति नेतृत्व करने में योग्य होते हैं। गणेश जी का बड़ा सिर यह भी ज्ञान देता है कि अपनी सोच को बड़ा बनाए रखना चाहिए।

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छोटी आंखें: छोटी आंखों वाले व्यक्ति चिंतनशील और गंभीर प्रकृति के होते हैं। गणेश जी की छोटी आंखें यह ज्ञान देती है कि हर चीज को सूक्ष्मता से देख-परख कर ही कोई नर्णिय लेना चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति कभी धोखा नहीं खाता।

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लंबे कान: लंबे कान वाले व्यक्ति भाग्यशाली और दीर्घायु होते हैं। गणेश जी के लंबे कानों का एक रहस्य यह भी है कि वह सबकी सुनते हैं फिर अपनी बुद्धि और विवेक से नर्णिय लेते हैं।

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गणपति की सूंढ़: जीवन में सदैव सक्रिय रहने का संदेश देती है। जो व्यक्ति ऐसा करता है उसे कभी दुखः और गरीबी का सामना नहीं करना पड़ता है।

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बड़ा उदर: गणेश जी का पेट बहुत बड़ा है। बड़ा उदर खुशहाली का प्रतीक होता है। गणेश जी का बड़ा पेट हमें यह ज्ञान देता है कि भोजन के साथ ही साथ बातों को भी पचाना सीखें। जो व्यक्ति ऐसा कर लेता है वह हमेशा ही खुशहाल रहता है।

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एकदंत: गणेश जी अपने टूटे हुए दांत से यह सीख देते हैं कि चीजों का सदुपयोग किस प्रकार से किया जाना चाहिए।

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