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कर्मचारियों की समस्याएं सुने बिना सीट से उठ गये निदेशक

-चेतावनी दी कि ऐसे ही उत्पीड़न होता रहा तो कर्मचारियों के पास आत्महत्या के प्रयास ही होगा अंतिम रास्ता

तीन महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला। पिछले 10 साल से ना ही कोई योजना चलाई गई और सरकार द्वारा कोई बजट भी नहीं दिया गया। मुख्यालय पर स्थित सभी कर्मचारियों को रिकवरी के पैसे से वेतन दिया जा रहा है। यह हाल अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम का है। जहां के कर्मचारी जब अपनी समस्या बताने यहां प्रबंध निदेशक शेष मणि पाण्डेय के पास शुक्रवार को पहुंचे तो वे अपनी सीट से उठकर चले गये।

कार्यवाहक अध्यक्ष मीना सिंह, अध्यक्ष समरजीत सिंह, महासचिव यूपी सिंह, हेमंत गुजर जब यहां के 84 कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर प्रबंध निदेशक अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम से वार्ता करने पहुंचे तो प्रबंध निदेशक महोदय अचानक से कहीं बाहर चले गए और मंगलवार को मिलने का पैगाम पहुंचवा दिया। मीना सिंह ने आरोप लगाया कि निगम के 84 कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। तीन माह से वेतन नहीं दिये जाने के कारण कर्मचारियों का घर परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी परिस्थिति में कर्मचारियों का ट्रांफफर दूसरे जिलों में किया जा रहा है। कर्मचारी बिना वेतन के दूसरी जगह काम कैसे करेगा। उन्होंने कहा कि दूसरे जिले में भी जाकर कर्मचारी को किराए का मकान लेना पड़ेगा ऐसी स्थिति में उसका कैसे खर्चा कैसे चला पायेगा। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रबंध निदेशक की ओर से सभी कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर ऐसी ही स्थिति रही तो कर्मचारियों के पास आत्महत्या जैसे प्रयास करने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं बचेगा।

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