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प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच लिखना डॉक्टर को महंगा पड़ा

बलरामपुर अस्पताल का मामला

बलरामपुर अस्पताल में गरीब मरीज को प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच लिखना डॉक्टर को महंगा पड़ सकता है। शासन ने कमीशनखोरी के इस धंधे पर सख्ती दिखाई है। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव प्रशांत कुमार त्रिवेदी ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं। तीन दिन के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश भी दिये हैं।

डायबटीज से पीड़ित मरीज को लिखी थी एमआरआई जांच

बाराबंकी निवासी आशा देवी (60) डायबिटीज से पीड़ित हैं। उनका इलाज वार्ड नंबर सात के एनएसआर कमरे में चल रहा है। शरीर में शुगर का स्तर गड़बड़ाने पर मरीज की हालत बिगड़ गई। उन्हें बेहोशी की हालत में बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया। सोमवार को राउंड पर आए डॉक्टर ने उन्हें एमआरआइ जांच लिखी। वहीं डॉक्टर के करीबी कर्मचारी ने चौक स्थित एक प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर के दलाल को फोन किया। बेटी अर्चना के मुताबिक दलाल ने जांच के 3500 रुपये लिए। इसके बाद दो बजे वार्ड के सामने एम्बुलेंस आ गई। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की मदद से मरीज को स्ट्रेचर से एम्बुलेंस तक लाया गया। उसके बाद मरीज को एम्बुलेंस पर लिटाया गया।

दो अफसर करेंगे जांच

मामले की जानकारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव प्रशांत कुमार त्रिवेदी ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं। तीन दिन के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश भी दिये हैं। लखनऊ के एडी मंडल डॉ. अतुल मिश्र व बलरामपुर निदेशक डॉ. राजीव लोचन मामले की जांच करेंगे।

नियम कहता है

सरकारी अस्पताल के डॉक्टर मरीजों को बाहर की जांच व दवाएं नहीं लिख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर मरीजों को उच्च सरकारी संस्थानों में जांच के लिए रेफर किया जा सकता है। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कमीशन के लालच में मरीजों से महंगी जांचें कराई जा रही हैं। ऐसा तब है जब लोहिया अस्पताल, केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्थान में एमआरआई जांच की सुविधा है। इसके बावजूद प्राइवेट डायग्नोसटिक सेंटर से जांच कराने के लिए मरीजों को मजबूर किया जा रहा है।

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