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अधिकतर मरीजों में ब्रेनस्ट्रोक का प्रमुख कारण हाइपरटेंशन

-विश्वरक्तचाप दिवस पर आईएमए की ओर से गोष्ठी का आयोजन

-इंडियन सोसाइटी ऑफ हाईपरटेंशन के पदाधिकारी भी रहे उपस्थित

मरीजों में ब्रेनस्ट्रोक का प्रमुख कारण हाइपरटेंशन है। करीब 75 प्रतिशत मामलों में ब्रेनस्ट्रोक केवल हाइपरटेंशन के कारण होता है। यह जानकारी केजीएमयू के लारी कार्डियोलॉजी विभाग के प्रो. ऋषि सेठी ने गुरुवार को विश्व हाइपरटेंशन दिवस के मौके पर आईएमए में आयोजित कार्यशाला में दी। उन्होंने बताया कि हाइपरटेंशन का प्रमुख कारण मोटापा, धूम्रपान, अधिक तनाव, शराब का सेवन है।

उन्होंने कहा कि नियमित रूप से व्यायाम, धूम्रपान छोड़ने, शराब का सेवन न करने और कम नमक के सेवन से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि हार्ट अटैक का आंकड़ा भी कुछ अलग नहीं है। करीब 50 प्रतिशत हार्ट अटैक केवल उच्च रक्तचाप के कारण ही होते हैं। पूरे विश्व में मौत का पहला कारण हाइपरटेंशन है। विश्व में होने वाली मौतों में करीब 25 प्रतिशत मौतें हाइपरटेंशन के कारण होती हैं। अगर जरा सी सावधानी बरती जाए तो इस बीमारी से बचाव संभव है। आईएमए के सचिव डॉ जेडी रावत, अध्यक्ष डॉ सूर्यकांत, डॉ जलीस फातिमा ने भी गोष्ठी में अपनी बात रखी।

अधिक समय तक उच्चरक्तचाप कर सकती है किडनी फेल

अगर लंबे समय तक उच्च रक्तचाप को नजरअंदाज किया जाए तो इससे गुर्दा भी फेल हो सकता है। कार्यशाला में मौजूद डॉ. अनुज माहेश्वरी ने बताया कि अकसर लोगों को उच्चरक्तचाप की शिकायत होती है लेकिन उन्हें पता ही नहीं होता। अगर पांच साल तक हाइपरटेंशन को नजरअंदाज किया जाए तो किडनी के करीब 50 प्रतिशत नेफरांस खत्म हो जाते हैं। ऐसे में गुर्दे के काम करने की शंक्ति आधी हो जाती है और धीरे-धीरे गुर्दे फेल हो जाते हैं।

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गर्भावस्था के दौरान भी महिलाओं में बढ़ रहा हाईपरटेंश का खतरा

केजीएमयू के डॉ नरसिंह वर्मा ने गर्भावस्था के दौरान हाईपरटेंशन हो जाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह बीमारी जेनेटिक, रहन-सहन, व्यायाम की कमी, भोजन की अधिकता से हो जाती है। बताया कि पहले तीन महीने में पता लगे तो इलाज संभव है। 12 से 14 प्रतिशत महिलाएं भारत में गंर्भावस्था के दौरा हाईपरटेंशन से ग्रस्ति हो जाती हैं। उन्होंने यह भी बताया 40 प्रतिशत महिलायें जिन्हें गर्भावस्था के दौरान ब्लडप्रेशर बढ़ने का पता लगता है। बच्चा होने के साल भर बाद भी वे हाईपरटेंशन या डायबटीज का शिकार हो सकती हैं।

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