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जन्म लिए रघुरइया, अवध में आज बाजे बधईया

-संत प्रेमभूषण की रामकथा का तीसरे दिन, प्रभु की बाललीला का सुंदर दर्शन कराया

‘हम रामजी के, राम जी हमारे हैं भजन के साथ राजधानी में गुरुवार को श्री राम कथा के तीसरे दिन बलरामपुर गार्डेन में व्यासपीठ पर आसीन संत प्रेमभूषण जी महाराज ने भगवान श्रीराम की बाल लीला का बहुत ही शानदार वर्णन किया। जिसका लोगों ने खूब लुत्फ उठाया। भगवान की बाललीला पर अपनी कथा का शुभारंभ करते हुए उन्होंने जब 'घर -घर आनंद छायों अयोध्या नगरी में, कौशल्या सुख पायों आयोध्या नगरी में'। भजन गाया तो कोई भी अपने को कथा में शामिल होने से रोक नहीं सका।

उन्होंने कहा कि भगवान के जन्म पर चक्रवती महाराज प्रसन्न हैं। अयोध्या आनंद के सागर में डूबी है क्योंकि अयोध्या में भगवान का आगमन हुआ है। इस मौके पर कैकयी ने एक और सुमित्रा ने दो पुत्रों को जन्म देकर आनंद को दो गुना कर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तव में आनंद के सागर मेरे राम ही है, वो सुख की राशि हैं। उन्होंने कहा कि जिसके स्मरण में राम है वो कभी दुखी नही हो सकता। भक्त का सारा निर्वाह स्वयं भगवान करते है। इसलिए सभी को मेरे राम का स्मरण करते रहना चाहिए। इससे पहले कथा की शुरुआत हनुमान चालीसा के साथ महाराज जी मंच पर विराजमान शिव-परिवार, राम-दरबार, हनुमान जी महाराज का विधिपूर्वक पूजन से हुई। आयोजक नीलकंठ ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर वीरेन्द्र गुप्ता और उनके परिवार ने व्यासपीठ पर आसीन संत प्रेमभूषण जी महाराज को रोली, चन्दन से तिलक लगाकर कथाव्यास का आदर पूर्वक पूजन किया। कथा से पूर्व श्री रामायण जी की आरती सामूहिक रूप से की गई। श्रोतागण बड़े भाव से खड़े होकर ताली बजाते हुए इसमें शामिल हुए।

आनंद के सागर हैं मेरे राम

पूज्य महाराज जी ने कहा कि वास्तव में आनंद के सागर मेरे राम ही है, वो सुख की राशि है। उन्होंने कहा कि जिसके स्मरण में राम है वो कभी दुखी नही हो सकता। पूज्य महाराज जी ने कहा कि भक्त का सारा निर्वाह स्वयं भगवान करते है। इसलिए सभी को मेरे राम का स्मरण करते रहना चाहिए। अपनी बात को और भी स्पष्ट करते हुए उन्होंने बहुत ही सुंदर भजन उपस्थित भक्तों के समक्ष गया। उन्होंने कहा 'जिसकी लागी लगन भगवान में उसका दिया भी जलेगा तूफान में'। अर्थात जो मेरे भगवान की भक्ति में लीन है उसके तारणहार स्वयं मेरे राम है। इसलिए अगर कष्टों से पार लगना है तो मेरे राम की शरण ने । उनका भजन करे। उनका भजन ही हमारे जीवन की वास्तविक पूंजी है।

इन भजनों का भक्तों ने लूटा रस

-'हम राम जी के , राम जी हमारे, मेरे तो प्राण प्यारे, सब भक्तन के रखवारे'

-'घर -घर आनंद छायों अयोध्या नगरी में, कौशल्या सुख पायों आयोध्या नगरी में'

-'जिसकी लागी लगन भगवान में उसका दिया भी जलेगा तूफान में'

साज पर महाराज की मित्रमंडली ने दिया पूरा साथ

संत प्रेमभूषण जी महाराज की कथा में संगत दे रही मित्रमंडली का भी जवाब नहीं। उनके आने से पहले भक्तों को जोड़े रहने के लिए लगातार भक्तिमय संगीत से समा बांधा गया। इसमें होली गीत से लेकर भोजपुरी भक्तिगीत भी शामिल रहे। तबले पर साथ दिया लाडली शरण(भाईजी) ने तो हरमोनियम पर संजीव, सह गायक डॉ धनंजय, राम जी बाबा, मजीरा वादक जितेन्द्र, बांसुरी वादक पाठक, सहगायक भरत, विष्णु और बैंजो पर शिव ने संभाला।

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