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कार्मिक स्थानान्तरण नीति का पालन नही होने पर नाराजगी

उत्तर प्रदेश के चंद अधिकारी कार्मिक स्थानान्तरण नीति का पालन नही कर रहे है। इसका विरोध राज्य कर्मचरी संयुक्त परिषद के नेताओं ने जताया है। आरोप यह है कि कार्मिक स्थानान्तरण नीति के पालन में कुछ अधिकारियों की मनमानी चल रही है। स्थानान्तरण के अनुरुप स्थानान्तरण भत्ता नहीं मिल रहा है। कार्मिकों को अपना वेतन खर्च करना पड़ रहा है।

कार्मिक स्थानान्तरण नीति का अनुपालन नही किये जाने का परिणाम यह हो रहा है कि स्थानान्तरित कार्मिकों को अनुमन्य भत्ता नही मिल पाता और स्थानान्तरित कर्मचारी को अपने वेतन से परिवहन खर्चा वहन करना पड़ता है। इस सम्बध में कार्मिकों के स्थानान्तरण के लिये स्थाई स्थानान्तरण नीति की मांग राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी, महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से की थी। उन्होंने सुझाव दिये थे कि विद्यालयों में बच्चों की शिक्षा का सत्र जुलाई में ही प्रारम्भ होता था तब यह नीति बनाई गई थी कि 30 जून तक स्थानान्तरण किये जायें। अब जबकि अधिकतर बच्चों के प्रवेश अप्रैल में होने लगे हैं। तब फरवरी-मार्च माह में स्थानान्तरण कर दिये जायें और मई में योगदान करा दिया जाये ताकि बच्चों की शिक्षा पर असर न पड़े। इसे शासन की ओर से आंशिक रुप में मानकर तीन वर्ष हेतु स्थाई स्थानान्तरण नीति बनाते हुई मई मे ही स्थानान्तरण करने का निर्णय लिया गया।

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