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'मोहे मीठो-मीठो सरयू जी को पानी लागे...'

-वाल्मीकि रामायण कथा महोत्सव का आठवां दिन

'मोहे मीठो-मीठो सरयू जी को पानी लागे, सीता राम जी की प्यारी रजधानी लागे' भगवान श्री राम के राजा बनने की सूचना अयोध्या में फैलने के साथ वहां के विहंगम दृश्य का वर्णन करते हुए मोती महल लॉन में चल रही वाल्मीकि रामायण का माहोल भी देखते ही बना। स्वामी राघवाचार्य के प्रसंगों का खूबसूरत वर्णन और भजनों को सुन भक्तजन भी नृत्य करने पर मजबूर हो जाते हैं।

वाल्मीकि रामायण कथा महोत्सव में बुधवार को भगवान राम के वन गमन का प्रसंग से राम भरत मिलाप तक के प्रसंगों को भक्तों ने बड़े भाव-विभोर होकर सुना। स्वामी राघवाचार्य जी ने अपनी अपनी वाणी से वाल्मीकि रामायण में छुपे गूढ़ रहस्यों को सुनाने के साथ प्रेरक कहानियां और संदेश भी दिये। वे कहते हैं राम जी राम जी कहते रहो व्यर्थ नहीं जायेगा। भले ही अभी इसका प्रताप न पता चले समय आने पर जरूर पता चलेगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अलार्म घड़ी होती है जितना समय सेट करो उतने समय पर ही बजती है। वैसे ही राम नाम की चाबी अपने में भरते रहो समय आने पर यह आपको जगा देगी। वाल्मीकि जी को दी गई कोयल की उपमा की उन्होंने व्याख्या की। उन्होंने कहा कि कथा में किसी चीज को मिलाने की आवश्यकता नहीं। अनर्गल चीजों को मिलाया गया तो कथा भी दूषित हो जाती है। भगवान की कथा में मिलाओ तो क्या इसके बारे में बोलते हुए उन्होंने कि वेद, पुराण, गीता, उपनिषदों और महापुरुषों की वाणि को मिलाने पर कथा परमात्मा रूपी सागर में गोते लगवा देती है। इसके बाद कथा पर लौटते हुए भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के अपने सम्पूर्ण धन ब्राह्मणों में बांटकर वन की चलने का प्रसंग आगे बढ़ाते हैं। राष्ट्र की परिभाषा पर भी उन्होंने अपनी कथा के माध्यम से प्रकाश डाला। इससे पहले संध्या आरती में ओपी श्रीवास्तव, दर्शन प्रकाश श्रीवास्तव, अभिमन्यु लाल श्रीवास्तव, सेखर कुमार, श्रीधर पाण्डेय पत्नी के साथ उपस्थित रहे। कैबिनेट मंत्री डॉ रीता बहुगुणा जोशी, अपर पुलिस महानिदेशक कमल सक्सेना आदि अनेक लोग उपस्थित रहे।

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कैकई में छिपा है 'रामराज्य' का रहस्य

जिस कैकई की वजह से भगवान को वन जाना पड़ा। उनकी चर्चा पर लौटते हुए स्वामी राघवाचार्य जी ने कहा कि वन जाने की योजना भगवान और कैकई ने बनाई थी। उन्होंने भगवान राम से कहा था कि वे चाहती हैं कि राज्य शब्द से राम का नाम जुड़ जाये। उन्होंने भगवान राम से कहा था कि अभी तक जितने राजा हुए सुख भोगकर राजा बने। प्रजा के समीप रहकर दुखों को भोगकर, लोगों की पीड़ाओं को समझे बिना कोई राजा नहीं बना। वे चाहती थी कि राम जिस राज्य के राजा बनें वो रामराज्य अखण्ड हो सब उसे याद करें। मां कैकई का चरित्र इसलिये ही काफी अदभुत है।

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